Saturday, April 26, 2008

कश्मीर की सैर ...
























Friday, February 8, 2008

महाराष्ट्र और हिन्दी भाषियों पर हमला

मुम्बई में उत्तर भारतीयों को वेवज्ह निशाना बनाया जाना दुर्भाग्पूर्ण है जिस तरह की वाहियात और गैर-जिम्मेदाराना बयान राज ठाकरे ने अभी दी है और उसके बाद मजदूरी करने वाले, टैक्सी चालकों जैसे लोगो को निशाना बनाया जा रहा है वो तो भारतीय संविधान पर ही सवाल उठा रहे हैं जिसमे ये कहा गया है की भारत का कोई भी नागरिक भारत के किसी भी हिस्से मे निवास कर सकता है या जीवन निर्वाह के साधन जुटा सकता है लेकिन मुम्बई के तथाकथित आकाओं को अपने लोगो को दिखाने के लिए जब कुछ नही होता तो एक ही मुद्दा अपनी जान बचाने के लिए नज़र आता है और वो होता है उत्तर भारतीयों को मुम्बई से निकालने का मुद्दा

राज ठाकरे हों या बाल ठाकरे दोनों के लिए हिन्दीभाषी लोग मुम्बई पर बोझ के समान ही है लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण ही है की कोई भी मुम्बई को मुम्बई बनाने मे हिन्दीभाषी की भूमिका को स्वीकार नही कर रहे हैं

बिहार या उत्तर प्रदेश के ज्यादातर लोग मेहनतकश के रूप मे मुम्बई मे काम करते है और मराठी लोग इतने निकम्मे और आलसी हो चुके हैं की उन्हें मेहनत वाले कामों के लिए कोई रखना पसंद नही करता जिनकी वजह से अब मराठियों को असुरक्षा की भावना घर करने लगी है, मानसिक रूप से वो अब हिन्दीभाषियों से डरने लगे हैं जिसके परिणाम सरूप हिन्दीभाषियों पर हमला, बच्चन के लिए जहर सब के सब मराठियों के मानसिक रोग को उजागर करते है

Friday, December 28, 2007

मुशर्रफ की दोगली राजनीती ...

पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की निर्मम हत्या, एक और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के काफिले पर भी धुआंधार गोलियां चलाया जाना ये ज़द्दोजहद सिर्फ और सिर्फ मुशर्रफ को पाकिस्तान का आला कमान बनाये रखने की कोशिश है और कुछ नही मुशर्रफ नही चाहते की कोई भी उनके सामने सर उठाये और अगर कोई इसकी हिम्मत करेगा तो उसका अंजाम मोहतरमा बेनजीर भुट्टो की तरह होगा ये तो साफ हो गया है

पाकिस्तान को जिस तरह से हथियारों का ज़खीरा और बेसुमार दौलत अमेरिका मुहैया कर रहा है उस से मिंया का सर सातवें आस्मान पर है एक तरह से पाकिस्तान की तबाही के पीछे अमेरिका का भी बहुत बड़ा हाथ है

अब पाकिस्तान की जनता मिंया मुशर्रफ को अब क्या जवाब देती है ये ही पाकिस्तान की किस्मत को तय करेगा

Friday, December 14, 2007

बहू

बहू

नई बहू के आने से

घर भर जाए तो

वह लक्ष्मी है

थोडा भी कम पड़े

तो कुलच्छनी है

शान्ति-दूत

शान्ति-दूत

हम बार-बार

शान्ति-संदेश


भिजवा रहे है

वे शान्ति-दूत पर ही

गोलियां बरसा रहे है

हिन्दी प्रेम

हिन्दी प्रेम

साल में एक दिन


हिन्दी दिवस मनाते है

पूरे साल जनाजा

हिन्दी का उठाने का

रिकार्ड बनाते है

नई परियोजनाएं

नई परियोजनाएं


रेल मंत्रालय

नई पटरियां

बिछाने की

योजना बना रही है

आतंकवादियों से मिलकर

पुरानी उडवा रही है

व्यापार

व्यापार

उनका व्यापार

अच्छा चल रहा है


हर बेटा

ऊँची कीमत

पर निकल रहा है

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