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Monday, May 24, 2021

Hadjod – हड़जोड़ एक चमत्कारी पौधा



Hadjod – हड़जोड़

परिचय

गिरहबाज, हड़जोड़, जिसका आयुर्वेदिक नाम अस्थिसंहार या अस्थिजोड़ है. बिहार में स्थानीय भाषा में इसे गिरहबाज कहा जाता है. इसलिए हमलोग इसे बचपन से गिरहबाज के नाम से ही जानते और पहचानते हैं. इसका वनस्पतिक नाम Cissus Quadrangularis (सीस्सुस क्वॉड्रंगुलारिस्) है. हड़जोड़ का मतलब हड्डी जोड़ या अस्थिजोड़ को अंग्रेजी में Bone setter (बोन सेटर) भी कहते हैं. आयुर्वेद में हड़जोड़ का तना, पत्ते तथा जड़ का औषधि के रुप में इस्तेमाल होता है. हड़जोड़ पौधा का तना चारकोनिय एवम गांठ की तरह से बने होते हैं, इसमें एक एक गांठ पर पत्ते निकले होते हैं, जो तना पुराना हो चूका होता है वो ज्यादातर पत्ते विहीन ही होते हैं. हड़जोड़ के तने में हृदय के आकार वाली छोटी पत्तियां होती है. बरसात में इसमें छोटे-छोटे फूल लगते हैं और जाड़े में लाल रंग के मटर के दाने के बराबर फल लगते हैं.

दक्षिण भारत और श्रीलंका में इसके तने को साग के रूप में प्रयोग करते हैं.

 

देश के विभिन हिस्सों में हड़जोड़ को भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता है:

Hindi- हड़जोड़, हड़संघारी, हड़जोड़ी, हड़जोडवा
Sanskrit- ग्रन्थिमान्, अस्थिसंहार, वज्राङ्गी, अस्थिश्रृंखला, चतुर्धारा
Oriya- हडोजोडा
Urdu- हडजोरा
Assamese– हरजोरा
Gujrati- चौधरी,  हारसाँकल
Bengali- हाड़भांगा, हरजोर
Marathi- कांडबेल, त्रीधारी, चौधरी
English- Edible stemmed vine, Veld grape, Winged tree vine

 

हड़जोड़ खास क्यों है ?

इस पौधे का उपयोग हड्डी के टूटने या मोच से संबंधी बीमारियों के चिकित्सा में किया जाता है या ये कहना ठीक होगा की किया जाता था. अब तो गाँव के लोग भी इसे नहीं पहचान पाते. हड़जोड़ को आयुर्वेद में औषधि के रुप में सबसे ज्यादा प्रयोग हड्डियों को जोड़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा भी हड़जोड़ पेट संबंधी समस्या, पाइल्स, ल्यूकोरिया, मोच, अल्सर आदि रोगों के उपचार में तो होता ही है साथ ही यह दर्दनाशक और पाचन रोगों में भी काम आता है.

 

औषधीय गुण

आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार हड़जोड़ में सोडियम, पोटैशियम, फास्फेट और कैल्शियम कार्बोनेट भरपूर पाया जाता है. कैल्शियम कार्बोनेट और फास्फेट हड्डियों को मजबूत बनाता है. आयुर्वेद में टूटी हड्डी को  जोड़ने में हड़जोड़ को रामबाण माना जाता है. इसके अलावा कफ, वातनाशक होने के कारण बवासीर, वातरक्त, कृमिरोग, नाक से खून और कान बहने पर इसके स्वरस का प्रयोग किया जाता है. मुख्य रूप से इसके तने का प्रयोग किया जाता है.

 

सबसे पहले बात करते हैं उस वजह की जिसकी वजह से इसका नाम ही हड़जोड़ पड़ा. ये टूटे हुए हड्डियों को जोड़ने में चमत्कारी रूप से काम करता है. हड़जोड़ के उपयोग से हड्डी के जुड़ने का समय 33-50 फीसदी तक कम हो जाता है.

·  हड़जोड़ की जड़ को सुखाकर चूर्ण कर उसे 2-5 ग्राम दूध के साथ लेने से टूटी हुई हड्डी जुड़ जाती है.

·        १. हड़जोड़ के तने या पत्तों के रस को 10-15 मिलीग्राम घी के साथ लेने से भी टुटा हुआ हड्डी जल्द जुड़ जाता है और दर्द में भी आराम पहुंचता है.

·         २. हड़जोड़ के तने या पत्तों लुगदी बना कर अलसी तेल के साथ टूटे या मोच वाले जगह पर बांधने से आराम मिलता है.

·        ३. हड़जोड़ के पकोड़े बनाकर 15 दिनों तक खाने से हड्डियों के टूटने में शीघ्र लाभ होता है तथा तीव्र वात के बीमारियों में लाभ मिलता है.


हड्डी सम्बन्धी रोगों में उपयोग

रीढ़ की हड्डी के दर्द से भी हड़जोड़ राहत दिलाता है. इसके लिए हड़जोड़ के पत्तों को गर्म करके सेंकने से दर्द में आराम मिलता है.

अगर मोच हो गया हो और दर्द से परेशान हों तो हड़जोड़ का घरेलू उपाय बहुत ही लाभकारी होता है. हड़जोड़ के तने या पत्ते का जो भी उपलब्ध हो का रस तिल तेल में मिलाकर गर्म कर मोच पर लगाने से मोच के दर्द में आराम मिलता है और मोच को जल्द ठीक करता है.

अन्य उपयोग

·        १. अस्थमा में हड़जोड़ के रस का 5-10 मिलीग्राम को गुनगुना कर पिलाने से श्वास में लाभ होता है.

·         २. हड़जोड़ के पत्ते के रस को मधु के साथ मिलाकर पीने से पाचन क्रिया की गड़बड़ी ठीक होती है.

·         ३. पाइल्स या बबासीर में भी इसका उपयोग फायदेमंद होता है.

·         ४. गठिया के दर्द से हड़जोड़  का सेवन करने से इससे आराम मिलता है. छिलका रहित तना एक भाग तथा आधा भाग उड़द की दाल को पीस कर तेल में छान कर पकोड़े बनाकर खाने से वातरोगों में आराम मिलता है.

·        ५. हड़जोड़ का उपयोग बदन दर्द में भी दर्दनिवारक साबित होता है. इसका उपयोग करने पर कुछ ही देर में दर्द से आराम मिल जाता है.

 

हड़जोड़ का उपयोग कैसे करें

·        १. 2-4 मिली तने जड़ का रस

·         २. 1-2 ग्राम पेस्ट

·        ३.  5-10 मिली पत्ते का रस

·         ४. इसके तने को तोड़कर महीन काट कर बेसन में पकोड़े बनाकर भी उपयोग किया जा सकता है.

·        ५.  इसका 5-6 अंगुल तना लेकर बारीक टुकड़े काटकर काढ़ा बना सुबह-शाम पीएं.

 

Wednesday, June 10, 2020

कोरोना और हम

Save Earth from Covid-19

छह महीने बाद भी कोरोना विश्व के लिए खतरा बना हुआ है. वर्ल्‍डओमीटर के डेटा के अनुसार आज तक विश्व में कोरोना संक्रमण के 73,25,401  मामले सामने आ चुके हैं. जिसमें मरने वालों की संख्या 4,13,749 हो चुकी है. भारत में भी आज तक कोरोना के 2,75,413 मामले आ चुके हैं और 7,719 लोग काल के गाल में समा चुके हैं. भारत में आज तक के आंकड़े के अनुसार मात्र 50,61,332 टेस्ट किये गए, जिसमें 2,75,413 कोरोना संक्रमित मिले. मतलब टेस्ट के हिसाब से संक्रमण 5.44% है और संक्रमितों में से 3% लोगों की ही जान गई है. ये हालत तब है जबकि जवान और स्वस्थ लोगों को बिना टेस्ट किए ही होम कोरेंटाइन कर ही इतिश्री कर दिया जाता है, अगर होम कोरेंटाइन किए गए लोगों की भी टेस्ट की जाती तो डेथ रेट और भी कम होती. आबादी के हिसाब से अगर भारत में कोरोना टेस्ट की संख्या पर भी नजर डाले तो आंकडें बेहद कम दिखते हैं. 

कोरोना के कहर के कारण



सरकार की सुपर हीरों की छवि बनाने की कोशिश में, विदेशों से जहाजों में भर-भर लोगों लाया गया और सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग का ड्रामा कर पागल कुत्तों की तरह पुरे देश में खुला घुमने छोड़ दिया गया. थर्मल स्क्रीनिंग को मैं मार्च के पहले हफ्ते से ही ड्रामा बोल रहा था और कई लोग उस वक्त इसे सरकार की वेवजह बुराई बता रहे थे. मेरे मार्च के इस पोस्ट को देखियें - कोरोना आखिर फैला कैसे ? उम्मीद है, मेरे उन मित्रों को अब तक थर्मल स्क्रीनिंग कितना कोरोना का पता लगा सकता है, ये समझ आ गया होगा.  फिर जाहिल और इंसानियत के दुश्मन जमातियों ने जो तांडव मचाया वो किसी से छुपा नहीं है. जाहिल जमातियों की वजह से कोरोना देश के हर छोटे-बड़े शहरों तक पहुँच गया. लोगों ने भी लॉक डाउन की हर दिन धज्जी उड़ाई. हमारे भागलपुर में आपातकालीन सेवा में आते-जाते जो नजारा सुबह-दोपहर-शाम सड़कों और बाजार का देखा, कभी लगा ही नहीं यहाँ कोई लॉक डाउन है. फिर रही सही कमी सरकार ने श्रमिकों के लिए ट्रेन चलाकर पूरी कर दी. और परिणाम जो होना था, वो हो रहा है...

हमारी नाकामी और कोरोना



लॉक डाउन की वजह से भारत में कोरोना की स्पीड शुरू में थोड़ी धीमी रही. पहली नाकामी रही विदेशों लोगों को लाना और उसके बाद उन सबको बिना कोरेंटाइन के सबको छोड़ देना. फिर दिल्ली के खांसी वाली सरकार के निकम्मेपन की वजह से जमातियों ने कोरोना का भरपूर पोषण किया और देश के कोने-कोने तक इसे पहुँचाया. और जो कमी रह गई उसे सरकार ने खुद पूरा कर दिया. सरकार पर श्रमिकों को अपने-अपने घर पहूँचाने का दबाव बढ़ा और सरकार ने लाखों प्रवासियों को ट्रेन से भर-भर पहुँचाया भी. अब चाहे राज्य सरकार की नाकामी रही हो या सरकारी तंत्र की जानीमानी कमी, कोरोना आज देश के गाँव-गाँव में पहुँच चूका है. स्थिति को सामान्य करने की जो सुपर सोनिक स्पीड अपनाई गई और लोगों की मुर्खता और ये मान लेने की वजह से "मुझे थोड़े ना कोरोना हुआ है जो मैं कोई परहेज करूँ" ने देश का बेडा गर्क कर दिया. कोरोना से सम्बंधित सुरक्षा उपायों को भी लोगों ने गंभीरता से नहीं लिया और ना ले रहे हैं.

कोरोना और नंबर गेम




हम कोरोना संक्रमित देशों की सूची में पीटी उषा से भी तेज भाग रहे हैं. आज हम 2,75,413 कोरोना संक्रमितों के साथ सूचि में 6 वें स्थान पर हैं और ऐसे ही विकास करते रहे तो इसी हफ्ते हम 4वां स्थान भी हासिल कर लेंगे. विकास की यही गति बनी रही तो उम्मीद है जल्द ही एक नंबर की दवेदारी भी पेश करेंगे. सरकार ने सबकुछ खोलने के निर्णय के साथ अगर स्कूल भी खोल दिए तो भारत शायद पहला राष्ट्र हो, जहाँ कम से कम 90% लोग संक्रमित होंगे. 

कोरोना की असली स्थिति 



भारत एक विशाल देश है जहाँ सघन आबादी में हम जीते हैं. पुरे देश का कोरोना टेस्ट किया जाए तो शायद सालों.... सालों लग जाएँ. तब तक शायद लोगों को कोरोना आ नाम भी याद ना रहे. आइये जो मुझे समझ आ रहा है मैं समझाता हूँ. अब अगर संक्रमण के सरकारी डेटा को पूरी देश की आबादी यानि 1,37,91,96,659 पर लागु कर देखें, जिनका टेस्ट नहीं हुआ या जिनमें लक्षण नहीं दिख रहे. मतलब 5% लोग भी संक्रमित हुए तो 6,89,59,832 लोग संक्रमित हो चुके हैं. अब करोड़ों लोगों के संक्रमण से मौत के आंकडे को देखेंगे तो ये कुछ भी नहीं रह जाता. लोग जिस तरह से सुरक्षा उपायों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं, मुझे उम्मीद है संक्रमितों की संख्या 6,89,59,832 से भी कई गुणा ज्यादा हो चुकी है. 

भारत में कोरोना से मौत 



भारत में दस लाख लोगों पर मात्र 200 टेस्ट किए गए हैं. दस लाख लोगों में से मात्र 6 लोगों की ही मौत हो रही है. मतलब हमें ज्यादा घबराने और डरने की जरूरत नहीं है. कोरोना संक्रमण से मरने वालों में ऐसे लोग ज्यादा हैं, जो पहले से गंभीर बिमारियों से ग्रसित हैं. मौत का आंकड़ा तो भारत में कम है फिर डरने वाली बात भी नहीं. 

सुरक्षा उपायों और सावधानियों के बाबजूद भी संक्रमित हो ही जाएँ तो ...

सुरक्षा उपायों और सावधानियों के बाबजूद भी संक्रमण हो ही जाएँ तो घबराएँ नहीं, हौसला रखें. हॉस्पिटल में हर किसी को एडमिट होने की जरूरत ही नहीं पड़ती. लाखों लोग बिना इलाज से ठीक हो रहें हैं, आप भी जानते हैं इसका कोई इलाज नहीं. तो जो लोग हॉस्पिटल से ठीक होकर निकल रहे हैं असल में उनका शरीर खुद ही कोरोना को हरा कर संक्रमण को ठीक कर रहा है. डॉक्टर की सलाह लें. अपने को आइसोलेट करें और साफ़ सफाई के साथ देशी उपायों को आजमायें. कोरोना हफ्ते में ठीक हो रहा है. भारतीयों की इम्यून सिस्टम यहाँ के रफ एंड टफ जीवन शैली की वजह से पहले ही स्ट्रोंग है, अगर थोड़ी कमी है तो उसे खानपान और जीवन को व्यवस्थित कर सुधारें. 

क्या करें 



सबसे पहले ये खुशफहमी पालना छोड़ दें कि सबकुछ ठीक है और कोरोना एक आम फ्लू जैसा है. कोरोना एक पेंचीदा वाइरस है, जिसे समझने में वैज्ञानिकों के पसीने छुट रहे हैं. फिर भी हमें कामकाज पर लौटना ही है, जिन्दगी को पटरी पर लाना है. जिन्दगी को सामान्य करने के चक्कर में गलती से भी स्थिति को सामान्य ना समझें. सावधानी और सुरक्षा उपायों को अपनाना होगा और कोशिश करनी होगी ज्यादा से घर में रहा जाएँ और सिर्फ कामकाज के लिए ही घर से निकलें. मौज मस्ती पर शायद कुछ महीने हमें रोक लगानी ही होगी. ये हमारे स्वास्थ्य के साथ इस माहामारी की स्थिति में पॉकेट के लिए भी बेहतर होगा और देश के लिए भी. अगर इन बिन्दुओं को ध्यान में रखेंगे तो कोरोना आपसे जरूर दूर भागेगा :    

  • सावधानी और बचाव के साथ ही अति आवश्यक होने पर ही घर से निकलें. 
  • मास्क, हाथ धोने का साबुन और हैंड सेनेटाइजर हमेशा साथ होना चाहिए. 
  • सिर्फ मास्क पहनना ही काफी नहीं, उसे इस्तेमाल करना भी सीखें. बार-बार मास्क को छूना मास्क ना पहनने से ज्यादा खतरनाक घर का राशन और अन्य जरुरी सामान को महीने से हिसाब से खरीदें और फलों और सब्जियों के लिए हफ्ते में एक दिन ही खरीददारी की कोशिश करें.
  • भारतीय खानापर विश्व में सर्वोत्तम है, उसे अपनाएँ जिससे आपकी रोग से लड़ने की क्षमता यानि इम्यून सिस्टम स्ट्रोंग होगा.
  • रात में जल्दी सोएं, देर रात्रि तक जागने से सबसे बुरा प्रभाव बॉडी क्लॉक पर पड़ता है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर होता जाता है. 
  • सुबह कोशिश करें सूर्योदय के साथ बिस्तर छोड़ ही दें. सूर्योदय के बाद सोना भी स्वास्थ्य को ख़राब करता है.
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज या योग करें और साथ में कुछ किलोमीटर की वाक भी करें.
  • सोशल डिस्टेंस का पालन करें और बाहर से पहले हाथ साफ करें, फिर डिटोल और साबुन से स्नान कर ही घर के किसी भी चीज को छुए. 
  • बाहर से आकर कपड़े भी साफ करें.
  • अगर ऑफिस जा रहे हैं तो ऑफिस से आकर फोन और लैपटॉप आदि को सेनेटाईज कर ही इस्तेमाल करें.
  • ऑफिस या बाहर इस्तेमाल होने वाली चीजों को घर में उपयोग ना करें. 
  • सावधानी ही बचाव है, इसका ख्याल रखें पर डर को दिल से निकाल दें.

Wednesday, May 13, 2020

आत्मनिर्भरता का पहला मंत्र

होमेमेड गेहूं की आटे से बने बिना अंड्डे के केक.
कोई कमी दिख रही है क्या? फिर बाजार क्यों जाना.  

कल ही एक पोस्ट लिखी थी, जिसका सार था आत्मनिर्भर बनना, फिर मोदी जी ने रात्रि में आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ा दिया. अब आप इस पोस्ट को पढ़कर खुद देख लो आप आत्मनिर्भर हो सकते हो या सिर्फ गप्पे मर सकते हों आत्मनिर्भरता की. कल लिखी पोस्ट को यहाँ देख सकते हैं - https://nakkarkhaanaa.blogspot.com/2020/05/blog-post_26.html

आत्मनिर्भरता का सबसे पहला अध्याय शुरू होता है पेट से. तो सबसे पहले बाजारुपन छोडिये और किचन में खुद पसीने बहाकर अपनी मेहनत से जो भी खाने का मन करे, बनाने का प्रयास कीजिये. मैं किसी को भी अपनी चटोरी जीभ को बांधने को नहीं कह रहा, क्योकि मैं खुद ही बड़ा चटोरा हूँ. अगर आप खानपान के मामले में आत्मनिर्भर हो गए और इसके लिए आपको बाजार पर निर्भर नहीं होना पड़ता. तो आप घरेलु स्तर पर आत्मनिर्भरता को कुछ हद तक प्राप्त कर चुके हैं. और अगर यही नहीं हो पा रहा आपसे, तो फिर आत्मनिर्भरता की बात कोरी कल्पना के सिवा कुछ नहीं.

पर मेरी चटोरीपंथी का सोर्स बाजारु नहीं. मेरी चटोरीपंथी पुर्णतः घर में बने आइटम से पूरी होती हैं. जिसमें पहले माँ का और अब श्रीमतीजी का पूर्ण सहयोग रहता है. श्रीमतीजी को अपने घर का सैफ का तगमा दे दिया है. भले मेरी प्रयोगधर्मिता के चक्कर में कई बार गड़बड़ भी होते रहते हैं और श्रीमतीजी हथियार डाल मैदान छोड़ने को होती भी हैं, पर पीछे से सपोर्ट देकर टिकाये रहता हूँ मैदान में. अब आप कहेंगे की किचन में क्या प्रयोगधर्मिता ?

तो भाई, प्रयोग श्रीमतीजी जी के किचन में अजब-गजब होते रहते हैं, बिना मैदे के केक, बिना मैदे की जलेबी, बिना मैदे के गोलगप्पे, बिना मैदे के मठरी और नमकीन. बिना रिफाइन के सारे पकवान, बिना तेल के मैं नहीं कह रहा.... रिफाइन कितना खतरनाक है इसका अंदाजा आपको तब होगा जब घर में कोई हार्ट का मरीज हो जायेगा. पनीर टिक्का से लेकर मंचूरियन तक और मिठाई  से लेकर नमकीन तक घर में. आइसक्रीम घर में, महिलाओं की पहली और अंतिम इच्छा होने वाली गोलगप्पे भी घर में बने तो फिर कही और क्यों जाना.

चलिए आज कुछ झलक दिखता हूँ, मेरी सैफ श्रीमतीजी के किचन से  निकले आइटमों की, जिसे क्लिक किया जा सका. ज्यादातर मामलों में प्लेट सामने आने के बाद ही हम टूट पड़ते हैं, तो फोटो लेना रहा ही जाता है.

सबसे पहले पारंपरिक कचौरी, आलू की सब्जी (जिसे आलू की भुजिया कहते हैं हमारे यहाँ) के साथ गाजर का हलवा. 


गाजर का हलवे को क्यों अकेला छोड़ा जाएँ 

बिहार-बंगाल की परमप्रिय मुढ़ी और पकौड़े  


बेक द केक
घर के केक की परंपरा दो दशक पुरानी हो चुकी है. वैसे ये केक खानदान की बड्डी तगड़ी सैफ मेरी बहनजी ने बनाया था.  








ट्रैवल, घुमक्कड़ी मेरे लिए कोई लग्जरी नहीं, मेरा धर्म बन चुका है. सोते - जागते, उठते - बैठते दिलों - दिमाग में फितूर बनकर छाया रहता है. अब ये मेरा धर्म कैसे हो सकता है, आप भी देख लो. भांजी का जन्मदिन था, जैसा आपलोगों को शायद पता हो मैं बाहर का केक खाता नहीं, तो केक घर पर ही बनता है. चाहें समान्य चाकलेट केक बने या थीम केक. तो केक बना और थीम था जंगल सफारी. 😍🎂😍 मतलब केक को भी न छोड़ा इस घुमक्कड़ी के पागलपन ने. और घुमक्कड़ी का फितूर घर सारे सदस्यों के सिर पर चढ़कर बोलता है. देखो केक पर बाघ, गैंडे, भालु सब दिखाई देंगे. 🤣😁😂 ☸ यायावरी परमो धर्मा ☸
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मीठे-मीठे बूंदी नमकीन के साथ आपने खाएं ही होंगे.
हाजिर है कल ही फिनिस किए गए घर में ही बने बूंदी. 


जलेबी और इमरती बिहार-यूपी के साथ उत्तर भारत में शायद सबसे ज्यादा खाये जाने वाले मिठाइयों में हो. जलेबी भी हमारी सैफ घर में ही बना डालती हैं और वो भी बिना मैदे और रिफ़ाइन्ड.  






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होली पर पकवान सबके घर बनते हैं, फिर इसी पारंपरिक को अपनी आदत क्यों नहीं बना पाते. 


मेरी पसंदीदा मुंग दाल के दही बड़े.
इसके स्वाद के आगे उरद दाल के दही बड़े, कही ठहरते हैं भला.




हम तो भुजिया और नमकीन में भी आत्मनिर्भर हैं... और आप ??? 


लोग पकौड़े खाने भी बाजार की ओर भागते हैं. हद है यार शादी में पहले लड़की से पूछना था ना. खाना बनाना भी आता है या सिर्फ खाती है. कुंवारें लोग खाने के शौक़ीन हों तो लड़की भी किचन में एक्सपर्ट देखना भाई... तभी आत्मनिर्भर हो सकता हैं हिंदुस्तान. 


पोई साग के पत्तों के पकोड़े. पोई खुद छत पर उगाई, पूरी ओर्गेनिक.
इसके स्वाद का कोई जवाब ही नहीं.



खांटी देशी, शाम का हल्का-फुल्का नास्ता  


गोलगप्पे किसी पसंद नहीं, पर मैं कभी बाहर इसे खा ही नहीं सकता.
ये गोलगप्पे कुछ स्पेशल भी हैं, ये आटे से बने गोलगप्पे हैं.




समोसे से मुझे सख्त नफरत है. कई बार इसे बनाते देखा है...
सड़े आलू का भरपूर इस्तेमाल होता है, इसलिए मैं कभी बाहर इसे खा ही नहीं सकता. पर जब घर में मैदे की जगह आटे से बने, रिफ़ाइन्ड की जगह सरसों तेल तो फिर खाते वक्त गिनती भी नहीं करता.








अगर श्रीमतीजी के हाथों में जादू हो और किचन में उन्हें भूत न दिखता हो फिर चाहे पूरे साल लॉक डाउन हो, मेरे जैसे फूडी को जिसे बाहर के खाने से सदा परहेज रहा है कोई फर्क़ नहीं पड़ता. पेट में दर्द तो बाहर प्लेट चाटने वालों को हो रहा होगा 😂. क्यों सही कह रहा हूँ ना? और हाँ, सबसे जरूरी बात तो बताना ही भूल गया, ये मैदा फ्री समोसे हैं 😜. अब आपलोगों को बुला तो नहीं सकता, देखकर काम चला लो. जय हो लॉक डाउन की... #indianfood #desifoodie #homemade #kitchenking #samose #sayyestogharkakhana
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पोई साग के पत्तों के पकोड़े छत के खेत में उग रही है, जो पूरी ओर्गेनिक है. इसका दौड़ तो जब - तब चलता ही रहता है.







Lockdown में घरों में बंद लोग जहाँ डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं, वही हमने खेती करना शुरू कर दिया है वो भी बिना खेत के. जी हाँ, ये पकौड़े पोई के पत्तों का का है, जिसे छत पर उगाया है. किचन वेस्ट के कंपोस्ट से उगाया गया, ये पूर्ण ऑर्गेनिक भाजी से बने पकौड़े का स्वाद के आगे रेस्टोरेंट का कोई भी व्यंजन बेकार है. #Lockdown #creativity #foodie #desifoodie #gardening #rooftopgarden #kitchengarden #organicfood #desifood #tasteofhome #homemade #sayyestogharkakhana #growyourownfood #yayavarektraveler
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