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Thursday, July 12, 2018

"यायावर एक ट्रेवलर" फिर नई शुरुआत

किसी ने क्या खुब कहा है -
"मंजिल मिल ही जायेगी भटकते ही सही,
गुमराह तो वो हैं जो घर से निकलते ही नहीं ."

सैर पर जाना या घुमक्कड़ी हर किसी किस्मत में नहीं. बिरले ही इस सौगात से नवाजे गये हैं. मुझे तो लगता है अगर एक सालमात्र एक साल कहीं यात्रा ना करूँ, तो मानसिक संतुलन ही खो दूँगा. जाने लोग पूरी जिंदगी बिना यात्रातीर्थाटन और सैर-सपाटे के कैसे बिता देते हैं. 

मस्तिष्क को चिंतनशील और क्रियाशील बनाने के लिये यात्रा करना बहुत जरुरी है. यात्रा करने से चूँकि वातावरण परिवर्तन हो जाता हैइसलिए मनुष्य के मन और मस्तिष्क में नवीनता आ जाती है. आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के लिये यात्रा एक महत्वपूर्ण साधन है. जो लोग दब्बू और संकुचित मानसिकता वाले हैंऐसे लोगों के लिये सैर-सपाटा एक अच्छा माध्यम हो सकता है आत्मनिर्भर बनने का.

यात्रा के जैसा कोई दूसरा सीखने और अनुभव करने का तरीका नहीं है. यात्रा आपको अपने क्षितिज विस्तृत करने और सीखने का नया आयाम प्रदान करता है. यात्रा आपको नई चीजेंनए भोजननए जगहोंभिन्न - भिन्न लोगों और नई संस्कृतियों को समझनेमहसूस करने की अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है. आप यात्रा में हवा में हों या सड़क पर हैंहर दिन नए अनुभवों के साथ आने वाली चुनौती से निपटते हैं.

निकले थे इस आस पे किसी को बना लेंगे अपना,
एक ख़्वाइश ने उम्र भर का मुसाफिर बना दिया.

पर्यटन को दुनिया का सबसे बेहतर इन्वेस्टमेंट कहा गया हैक्यूँकि ये इनवेस्टमेंट आप अपने आप में करते हैं.

World best investment advice:
"Investment in Travel is an Investment in Yourself."
~Matthew Karsten

इस भाग-दौर भरी जिन्दगी में अपनी यात्राओं (घुमक्कडी) के लिए जो भी थोड़ा समय निकाल पाता हूँ, उसके जुड़े अनुभवों को शब्दों में पिरोने की कोशिश कर रहा हूँ. इसका एकमात्र मकसद सिर्फ अपने लिए ट्रेवल डायरी और आपके लिए जानकारी को एक जगह लाने का प्रयास मात्र है. मैं कोई लेखक नहीं, पिताश्री के बाद ना ही कोई मार्गदर्शक बचा. जो भी टूटी-फूटी भाषा आती हैं, बस लिख रहा हूँ. ना मुझे हिन्दी का बहुत अच्छा ज्ञान हैं और ना व्याकरण का. गलतियाँ तो होंगीं. सुझाव देने का कष्ट करेंगे, तो शायद सुधार पाऊं. "यायावर एक ट्रेवलर" पर आप मेरी यात्रा संस्मरण को पढ़ सकते हैं.

Tuesday, November 12, 2013

साहित्य विनोद : एक नई ब्लॉग की शरुआत

http://sahityavinod.blogspot.in 


जल्द ही आपलोगों के सामने प्रस्तुत होने वाली है पिताश्री को समर्पित  एक नई ब्लॉग जिसमें अपने पिताश्री की रचनाओं की मोतियों की माला आपलोगों के सामने लानेवाला हूँ | कृपया कुछ इंतज़ार करें ...


Monday, December 5, 2011

फिर नई शुरुआत



काफी लंबे समय के बाद अब फिर से अपने ब्लॉग पर लिखने की सोच कर इसे अपडेट कर रहा हूँ | उम्मीद है अपनी लेखनी को फिर से जिंदा कर सकूं, जो की पिताश्री के देहांत के साथ ही बंद हो गया| पिताश्री ही मेरे लिखनी के मूल श्रोत थे | उन्होंने मेरे छोटे-से-छोटे विचारों को भी विस्तृत कर एक नया आयाम दिया | मेरी अब तक की प्रकाशित रचनाओं में चाहे वो विभिन्न समाचार-पत्रों में छपी हो या पत्रिकाओं में, उनके विचारों ने एक अहम भुमिका निभाई| उनके जैसी विस्तृत विचारों का धनी होना, अपने आप में एक उपलब्धि है |



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