अंशुमान चक्रपाणि का दशकों पुराना ब्लॉग नक्कारखाना (Nakkarkhana), विचारों के सैलाब को शब्द देने का एक माध्यम है.
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Friday, February 8, 2008
महाराष्ट्र और हिन्दी भाषियों पर हमला
राज ठाकरे हों या बाल ठाकरे दोनों के लिए हिन्दीभाषी लोग मुम्बई पर बोझ के समान ही है लेकिन ये दुर्भाग्यपूर्ण ही है की कोई भी मुम्बई को मुम्बई बनाने मे हिन्दीभाषी की भूमिका को स्वीकार नही कर रहे हैं
बिहार या उत्तर प्रदेश के ज्यादातर लोग मेहनतकश के रूप मे मुम्बई मे काम करते है और मराठी लोग इतने निकम्मे और आलसी हो चुके हैं की उन्हें मेहनत वाले कामों के लिए कोई रखना पसंद नही करता जिनकी वजह से अब मराठियों को असुरक्षा की भावना घर करने लगी है, मानसिक रूप से वो अब हिन्दीभाषियों से डरने लगे हैं जिसके परिणाम सरूप हिन्दीभाषियों पर हमला, बच्चन के लिए जहर सब के सब मराठियों के मानसिक रोग को उजागर करते है
नक्कारखाना खुद को स्वछंद अभिव्यक्ति करने का माध्यम है. मुझे पूज्य पिताश्री से पढ़ने और लिखने का शौक विरासत में मिला, ये बात अलग है की मेरी लेखनी में उनके जैसा पैनापन और लोगों को बांधे रखने की कूबत नहीं.
नक्कारखाना एक छोटा-सा प्रयास है अपने अंतर्मन में उबलते विचारों को लिपिबद्ध करने का और दिल में जल रहे गुस्से के भड़ास को निकालने का. आपको मेरा ये प्रयास कैसा लगा जरूर बताये, आपकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इन्तजार रहेगा|
-धन्यवाद.
Friday, December 28, 2007
मुशर्रफ की दोगली राजनीती ...
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की निर्मम हत्या, एक और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के काफिले पर भी धुआंधार गोलियां चलाया जाना ये ज़द्दोजहद सिर्फ और सिर्फ मुशर्रफ को पाकिस्तान का आला कमान बनाये रखने की कोशिश है और कुछ नही मुशर्रफ नही चाहते की कोई भी उनके सामने सर उठाये और अगर कोई इसकी हिम्मत करेगा तो उसका अंजाम मोहतरमा बेनजीर भुट्टो की तरह होगा ये तो साफ हो गया है
पाकिस्तान को जिस तरह से हथियारों का ज़खीरा और बेसुमार दौलत अमेरिका मुहैया कर रहा है उस से मिंया का सर सातवें आस्मान पर है एक तरह से पाकिस्तान की तबाही के पीछे अमेरिका का भी बहुत बड़ा हाथ है
अब पाकिस्तान की जनता मिंया मुशर्रफ को अब क्या जवाब देती है ये ही पाकिस्तान की किस्मत को तय करेगा
नक्कारखाना खुद को स्वछंद अभिव्यक्ति करने का माध्यम है. मुझे पूज्य पिताश्री से पढ़ने और लिखने का शौक विरासत में मिला, ये बात अलग है की मेरी लेखनी में उनके जैसा पैनापन और लोगों को बांधे रखने की कूबत नहीं.
नक्कारखाना एक छोटा-सा प्रयास है अपने अंतर्मन में उबलते विचारों को लिपिबद्ध करने का और दिल में जल रहे गुस्से के भड़ास को निकालने का. आपको मेरा ये प्रयास कैसा लगा जरूर बताये, आपकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इन्तजार रहेगा|
-धन्यवाद.
Friday, December 14, 2007
बहू
नई बहू के आने से
घर भर जाए तो
वह लक्ष्मी है
थोडा भी कम पड़े
तो कुलच्छनी है
नक्कारखाना खुद को स्वछंद अभिव्यक्ति करने का माध्यम है. मुझे पूज्य पिताश्री से पढ़ने और लिखने का शौक विरासत में मिला, ये बात अलग है की मेरी लेखनी में उनके जैसा पैनापन और लोगों को बांधे रखने की कूबत नहीं.
नक्कारखाना एक छोटा-सा प्रयास है अपने अंतर्मन में उबलते विचारों को लिपिबद्ध करने का और दिल में जल रहे गुस्से के भड़ास को निकालने का. आपको मेरा ये प्रयास कैसा लगा जरूर बताये, आपकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इन्तजार रहेगा|
-धन्यवाद.
शान्ति-दूत
हम बार-बार
शान्ति-संदेश
भिजवा रहे है
वे शान्ति-दूत पर ही
गोलियां बरसा रहे है
नक्कारखाना खुद को स्वछंद अभिव्यक्ति करने का माध्यम है. मुझे पूज्य पिताश्री से पढ़ने और लिखने का शौक विरासत में मिला, ये बात अलग है की मेरी लेखनी में उनके जैसा पैनापन और लोगों को बांधे रखने की कूबत नहीं.
नक्कारखाना एक छोटा-सा प्रयास है अपने अंतर्मन में उबलते विचारों को लिपिबद्ध करने का और दिल में जल रहे गुस्से के भड़ास को निकालने का. आपको मेरा ये प्रयास कैसा लगा जरूर बताये, आपकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इन्तजार रहेगा|
-धन्यवाद.
हिन्दी प्रेम
साल में एक दिन
हिन्दी दिवस मनाते है
पूरे साल जनाजा
हिन्दी का उठाने का
रिकार्ड बनाते है
नक्कारखाना खुद को स्वछंद अभिव्यक्ति करने का माध्यम है. मुझे पूज्य पिताश्री से पढ़ने और लिखने का शौक विरासत में मिला, ये बात अलग है की मेरी लेखनी में उनके जैसा पैनापन और लोगों को बांधे रखने की कूबत नहीं.
नक्कारखाना एक छोटा-सा प्रयास है अपने अंतर्मन में उबलते विचारों को लिपिबद्ध करने का और दिल में जल रहे गुस्से के भड़ास को निकालने का. आपको मेरा ये प्रयास कैसा लगा जरूर बताये, आपकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इन्तजार रहेगा|
-धन्यवाद.
नई परियोजनाएं
रेल मंत्रालय
नई पटरियां
बिछाने की
योजना बना रही है
आतंकवादियों से मिलकर
पुरानी उडवा रही है
नक्कारखाना खुद को स्वछंद अभिव्यक्ति करने का माध्यम है. मुझे पूज्य पिताश्री से पढ़ने और लिखने का शौक विरासत में मिला, ये बात अलग है की मेरी लेखनी में उनके जैसा पैनापन और लोगों को बांधे रखने की कूबत नहीं.
नक्कारखाना एक छोटा-सा प्रयास है अपने अंतर्मन में उबलते विचारों को लिपिबद्ध करने का और दिल में जल रहे गुस्से के भड़ास को निकालने का. आपको मेरा ये प्रयास कैसा लगा जरूर बताये, आपकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इन्तजार रहेगा|
-धन्यवाद.
व्यापार
उनका व्यापार
अच्छा चल रहा है
हर बेटा
ऊँची कीमत
पर निकल रहा है
नक्कारखाना खुद को स्वछंद अभिव्यक्ति करने का माध्यम है. मुझे पूज्य पिताश्री से पढ़ने और लिखने का शौक विरासत में मिला, ये बात अलग है की मेरी लेखनी में उनके जैसा पैनापन और लोगों को बांधे रखने की कूबत नहीं.
नक्कारखाना एक छोटा-सा प्रयास है अपने अंतर्मन में उबलते विचारों को लिपिबद्ध करने का और दिल में जल रहे गुस्से के भड़ास को निकालने का. आपको मेरा ये प्रयास कैसा लगा जरूर बताये, आपकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इन्तजार रहेगा|
-धन्यवाद.
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