Saturday, April 24, 2021

कोरोना और ऑक्सीजन

 

आज बैठे - बैठे मन में एक विचार आया –

इसी महीने ग्यारह साल से रह रहे फ्लैट को छोड़कर दूसरे घर में सिर्फ और सिर्फ इसलिए शिफ्ट किया, क्योंकि नए मकान मालकिन को छत पर गमलों में लगे पौधों से नफरत थी. हर महीने बंगलोर से ही गमलों को हटाने की नसीहत कई महीनों से दे रही थी. एक बार तो हमने भी सोचा हर महीने के किचकिच से अच्छा है, पौधे किसी को दे दूँ या उखाड़ फेंकूं. जिस दिन केजरीवाल के खानदान से ताल्लुक रखने वाली मकान मालकिन टपक पड़ी, उस दिन रायता फैला देगी. कई पौधों को उखाड़ फेंका, क्योंकि कोई वारिस ना मिला. आधे पौधे नष्ट होने के बाद आत्मा ने धिक्कारना शुरू कर दिया, मन बेचैन हो उठा. दो - तीन रात ठीक से सो नहीं पाया. फिर फैसला किया, अब इस फ्लैट को ही अलविदा कह देंगे. आखिर हर महीने समय से मोटा किराया चुकाते हैं, तो फिर दूसरों की सनक क्यों झेलें. और हमने घर शिफ्ट कर डाला और प्रकृति और पौधों से नफरत करने वाली चुड़ैल से अपने आधे पौधे बचा लिए. अब ये सब रामकहानी मैं आपको क्यों बता रहा हूँ??? असल में ये रामकहानी असली कहानी की पृष्ठभूमि मात्र है, असली कहानी तो अभी बाकी है.

प्रकृति और पेड़ - पौधों का हमने जितना विनाश किया है, उसका ही परिणाम है कि आज ऑक्सीजन के बिना जान से हाथ धोना पड़ रहा है. कोरोना के तांडव पर नजर डालें तो ज्यादा प्रदूषित शहरों और जगहों पर य़े आतातायी बनकर कहर ढा रहा है और मौत ऐसी जगहों पर ज्यादा हो रही है. गावों और प्रकृति की गोद में रहने वालें लोग आज भी मौज में जी रहे हैं. वहाँ कोरोना कुछ बिगाड़ ना पा रही, या फिर रुग्ण और बीमार लोग ही ऐसी जगहों पर लपेटें में आ रहे हैं. ऐसा इसलिए हो रहा है, क्योंकि वहाँ ऑक्सीजन की मात्रा हवा में इतनी है कि किसी को ऊपर से चढ़ाने की नौबत नहीं आती.

कोरोना  के इस कहर में या तो हम और आप अंतिम यात्रा पर निकल लेंगे या फिर माँ प्रकृति की कृपा और अपने शरीर को इससे लड़ने के लिए तैयार कर रखा होगा तो बच लेंगे. कोरोना दो अहम सबक दे रहा और पूरी दुनिया केवल और केवल एक पर ही मुद्दे पर सर फोडू चर्चा में लगी पड़ी है -

"अपने को ऐक्टिव और स्वस्थ रखने के लिए योग, एक्साइज, वॉक, दौड़कर अपने को चुस्त - दुरुस्त रखो, कोरोना कुछ ना बिगाड़ पायेगा."



हो सकता है य़े बातेँ सही हों - योगी, डॉक्टर, वैज्ञानिक, अनुसंधान में लगे लोग सब यही सलाह दे रहे हैं, तो गलत तो नहीं होगा. पर मेरी छोटी सी समझ ये कहती है कि य़े सलाह ठीक वैसे ही है, जैसे आस-पड़ोस में आग लगी हो और आप अपने घर का ऐसी (AC) चलाकर चैन की बंसी बजाइए और कूल रहिये. सोचिये जरा, आखिर इस मूर्खतापूर्ण तरीके से कब तक बचेंगे???

 

इस कोरोना के कहर के वक़्त का दूसरा अहम पहलू है - ऑक्सीजन.

जी हाँ, ऑक्सीजन. जैसे ही पता चला रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, लग जाते हैं ऑक्सीजन की खोज में. आज का ट्रेंड यही है. धन्ना सेठों ने अपने घरों में बेवजह ऑक्सीजन सिलेंडर भरभर रखा हुआ है, जाने कब जरूरत पड़ जाए. और उधर हजारों लोगों की जान सिर्फ और सिर्फ दो घूंट ऑक्सीजन नसीब ना हो पाने की वजह से जा रही है. खैर, ये सदियों से होता आया है और आगे भी होता रहेगा. इस खास और आम की असमानता पर मेरा और आपका कोई बस नहीं. तो करें क्या??? वो करिए जो आपके बस में है. 


जी हाँ, पहला उपाय तो आप कर ही रहे हैं, जिसे जोरशोर से मिडिया के हर माध्यम से प्रचारित और प्रसारित किया जा रहा है. आज हम बात करेगे उस दुसरे उपाय की जिसकी बात कोई नहीं कर रहा. प्रकृति का पोषण कीजिये, प्रकृति का  रक्षण कीजिये. वृक्ष लगाएं, जंगल बढ़ाए... अब आप सोच रहे होंगे, क्या बकवास कर रहा हूँ. ये काम कोई एक दिन में होगा क्या???








मेरे - आपके जैसे लोग तो शहरों में कबूतर के खोप जैसे घरों में रहने को बाध्य है और पेड़ कहाँ लगाये भाई??? इसका भी उपाय है. आज ही शुरुआत कीजिए. घरों के अंदर, छतों और बालकनी में गमले में जितना हो सकें छोटे पौधें लगाए. तुलसी, घृत कुवांरी (एलोवेरा), पुदीना, लेमन ग्रास जैसे औषधीय पौधें लगाकर शुरुआत कीजिए. कई इंडोर प्लांट हैं - मनी प्लांट, स्पाइडर प्लांट, स्नेक प्लांट, पीस लिली, एरिका पाम, घृत कुवांरी (एलोवेरा), रबर प्लांट, बैम्बू प्लांट जैसे पौधे, घर के अंदर अच्छे से बढ़ते है और ऑक्सीजन लेवल भी बनाए रखते हैं. ऐसे पौधों को कमरे की खिड़कियों, बरामदे जहाँ जगह मिले लगाईये. अब भी अगर बात समझ नहीं आ रही तो शायद ये आखिरी मौका है आपके पास, इसके बाद फिर ऐसी सलाह मानने के लिए ना आपके पास समय होगा और ना जरूरत. क्योंकि मरे हुए लोगों की आत्माओं को ना ऑक्सीजन की जरूरत होती है और ना ऑक्सीजन सिलेंडर की. हो सकता है अभी ये पोस्ट बकवास लगे. पर आने वाले समय में जब कोरोना का कहर थोडा कम होगा, यही बात आपको वैज्ञानिक से लेकर हर कॉपी पेस्ट वाले समझा रहे होंगे.

Sunday, July 12, 2020

मोदी जी के निजीकरण पर बेहतरीन गीत...

मोदी जी के निजीकरण के शानदार निर्णय और काम पर गाया गया बेहतरीन गीत. 
छोटा सा गीत है ... आप भी सुनिए, शायद समझ में आये.



Friday, July 10, 2020

क्या आप भी ऐसी ही हालत में जाना चाहते हैं?

अंधों की बस्ती में फिर आइना बेचने आया हूँ

भागलपुर शहर में पहले ही कोरोना का तांडव शुरू हो चूका है. बिना किसी मुहैया सुरक्षा उपायों के मार्च से इमरजेंसी ड्यूटी पर काम पर लगे भागलपुर रेलवेकर्मीयों में से दो दिनों में दर्जन भर लोग कोरोना की चपेट में आ गए हैं. पर भागलपुर में रहने वाले किसी भी रेलवेकर्मी की अभी तक जाँच नहीं की जा सकी. भागलपुर के सभी संक्रमितों की हालत सीरियस, प्रशासन सो रहा है. ना ही टेस्ट किया जा रहा और ना ही हॉस्पिटल में भर्ती की गई. सबके-सब बेबस से मायागंज और सदर हॉस्पिटल के चक्कर काट - काट कर आखिर घर वापस आ गए. जमालपुर से आने वाले एक कर्मी की मुंगेर में की गई टेस्ट रिपोर्ट पोजेटिव आई. संक्रमितों के परिवारों वालों का हाल बेहाल है, सबके सब हिम्मत हार रहे हैं. रोना-ढोना शुरू हो चूका है. 

हॉस्पिटल और सरकारी डॉक्टर संक्रमितों के टेस्ट करने में इतना खौफ खा रही है. जबकि ये डॉक्टर सामान्य सर्दी खांसी वालों को भी बिना पीपीई किट पहले और दो - दो ग्लब्स एक के ऊपर एक घुसेड़े देखते तक नहीं. इतनी तैयारी के बाद भी देखते हैं तो कम से कम 15 फिट दूर से. ऐसे डॉक्टर कोरोना पीड़ितों को हॉस्पिटल में बचाते कैसे हैं, यही तमाशा देख कर मुझे हंसी आती है... मुझे हंसी आती है जब समाचार आता है .... "कोरोना को हराने वालों को ताली बजाकर हॉस्पिटल से विदा किया गया." सबकुछ बस मिडियावादी होकर रह गया है. लोग बचते अपने दम पर हैं और नाम अपने चैम्बर से ना निकलने वाले डॉक्टर कमा रहे हैं.

सोचिये...

फोन पर कोरोना संक्रमितों की मदद का भरोसा दिया जाता है. भरोसा देने वाले विज्ञापनों पर कई करोड़ खर्च कर दिए गए, पर संक्रमित मरीज जब खुद चलकर हॉस्पिटल पहुंचता है. तब वहाँ उसे ना कोई डॉक्टर मिलता है और ना कोई सिस्टम. कोरोना संक्रमित भटक रहा यहाँ से वहाँ, वहाँ से यहाँ, पर कोई टेस्ट तक करने वाला नहीं. अगर गलती से कोई डॉक्टर या कर्मी मिल भी गया तो ये कंफ़र्म होने पर कि ये कोरोना संक्रमित हो सकता है, उसे Home Quarantine रहने को बोल हॉस्पिटल से भगा देते हैं. भागलपुर में हॉस्पिटल के साथ प्रशासन भी अति निकम्मा और आलसी है. हालत अति दयनीय होती जा रही है, पर टेस्ट करने में भी कोताही. जैसे इनके बाप का पैसा खर्च हो रहा हो. बिहार में कोरोना टेस्ट सिर्फ VIPs, नेता या फिर उसने चमचे का हो रहा है.

अब आप खुद सोचिये... क्या आप भी ऐसी ही हालत में जाना चाहते हैं? 

अपने परिवार के खातिर ही सही, लगाम लगाइए अपनी मौज - मस्ती और बाहर निकलने की प्रवृति पर. अति आवश्यक होने पर या काम पर जाना हो तो सुरक्षा के सारे उपायों का पालन कीजिये. इस पोस्ट को पढ़िए और सतर्क रहिये- कोरोना और हम. वरना ले डूबेगा ये कोरोना. अभी भी वक्त है सुधर जाओ, वरना सिधारने की नौबत आ जाएगी. जिन्हें लगता है कोरोना सिर्फ सर्दी-खांसी है. उनके लिए बस इतना कहना चाहूँगा. 
बस अपना या अपने अपनों के बारी आने का इंतजार करिए. जिस दिन आपकी बारी आ गई, समझ आ जायेगा आखिर कोरोना किस बला नाम है. 

मुझे पता है जब आपने आज तक दी मेरी चेतावनी नहीं मानी, तो आज इस पोस्ट से भी किसी कोई कोई फर्क पड़ने वाला नहीं. तभी तो शीर्षक रखा है- "अंधों की बस्ती में फिर आइना बेचने आया हूँ".  

Friday, July 3, 2020

भागलपुर का दुर्भाग्य बनेगे व्यापारी वर्ग


भागलपुर में अब हुआ है खेल शुरू कोरोना का. शहरी आबादी अब चपेट में आना शुरू हो गई है. पर लोगों को कारण समझ में नहीं आ रहा.

अरे महामुर्खों ...
कारण अब सिर्फ एक है ब्रह्मपुत्र मेल.
व्यापारी समाज अपने कालेधन को ढ़ोंने के लिए जिस तरह रेलवे और सरकार पर भागलपुर से सारे ट्रेन को चलाने का दबाव बना रहा है.... उसका परिणाम भागलपुर क्षेत्र तो भुगतेगा पड़ेगा, व्यापारी समाज भी बचने वाले नहीं. एक ट्रेन जो भागलपुर से मात्र गुजर रही है, तो उसने शहरी क्षेत्र में इतना कोरोना का प्रसाद बांटा है कि आज हर मारवाड़ी मोहल्ले में दो - चार घर कोरोना संक्रमित है. वो भी सरकारी खाते में. बिना हिसाब किताब वाले कोरोना मरोजों को तो यमराज ही पहचान सकते हैं, बिहार सरकार के कूबत से बाहर है.
भागलपुर बस कुछ दिन और चैन से जी लो. इसके बाद व्यापारी संघ और बड़े पहुँच वाले व्यापारियों के पाप को पुरे शहर को ढोना है. व्यापारी संघ और बड़े पहुँच वाले व्यापारियों ने सरकार को डंडा कर - कर भागलपुर से लगभग सभी ट्रेनों के चलने का रास्ता साफ कर दिया है. हफ्ते - दस दिन में सभी ट्रेन चल पड़ेगी... ये समाज अपने कालाधन से व्यापर को गति दे सकेगे, जो लॉक डाउन की वजह से ऑनलाइन से एक नंबर से धंधा करने को विवश हैं. पर पूरा शहर कोरोना के गिरफ्त में होगा.
आओ कोरोना, यहाँ बहुत जाने वाले तैयार बैठे हैं. ले जाओ.
बोलो कालेघन वालों की जय हो!

Tuesday, June 30, 2020

नई दिशा

नई दिशा

पहले अच्छी तरह से
हडडी–पसली तोड़ दो.
खड़ा न हो सके
ऐसा निचोड़ दो.
टूटकर पंगु हो जाए
तब देश को नया मोड़ दो.

मुफ्तखोर भारत

मोदीजी का देश के नाम लॉक डाउन के घोषणा से लेकर अब तक का छठा संबोधन, अभी-अभी मोदीजी के वेबसाइट पर सुना. सुनकर ये तो पता चल गया कि सरकार अब ये सांत्वना नहीं दे रही कि कोरोना इस महीने चला जाएगा या अगले महीने चला जाएगा. मतलब सरकार अब ये समझ चुकी है, देश की हालत आने वाले दिनों में और भी बदतर होने वाला है.

पर इसके लिए जिस तरह से सरकार लोगों को मुफ्तखोरी की रबड़ी बाँट रही है, ये अर्थव्यवस्था को बिलकुल ही पंगु बना देगा और लोगों को कामचोर. हमारा ग्रामीण क्षेत्र पहले से ही मजदूरों और कामगारों की कमी झेल रहा. ग्रामीण मजदुर या तो पलायन कर रहे हैं या फिर मुफ्त की रोटी मचान पर बैठकर तोड़ रहे हैं. इस तरह से लोग और निकम्मे और आलसी बनेंगे. जब लोगों का पेट बैठ-बिठाए ही भरता रहेगा, तो फिर कोई क्यों काम करे. 

वाह मोदीजी डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ, सेना, रेलवे, सफाई कर्मी जो इस कोरोना काल में जान हथेली पर लेकर काम कर रहे हैं, उन्हें तो आप उपहार में सैलरी पर कैंची चला रहे हो और यहाँ 90 करोड़ लोगों को मुफ्त की रबड़ी बाँट रहे हो, जो दो रूपये किलो की राशन खाकर पहले ही निकम्मे और कामचोर हो चुके हैं. आत्मनिर्भर भारत बने ना बने, निकम्मा भारत तो जरुर बनेगा.
जय हो... जय हो. 


देश की हालत क्या होगी, यही सोचकर दशकों पहले लिखी मेरी ये कविता आज सहसा ही याद हो आई. ये 2002 में उस समय के दिग्गज हिंदी पत्रिका में ऑनलाइन छपी थी. 


नई दिशा

पहले अच्छी तरह से
हडडी–पसली तोड़ दो.
खड़ा न हो सके
ऐसा निचोड़ दो.
टूटकर पंगु हो जाए
तब देश को नया मोड़ दो.

-अंशुमान चक्रपाणि 
(http://hindinest.com/kavita/2003/034.htm)

Sunday, June 28, 2020

सबसे बड़ा आतंकवादी

क्या आप जानते हैं आज देश का सबसे बड़ा दुश्मन कौन है?

देश का सबसे बड़ा दुश्मन आज आतंकवादी, जेहादी, पाकिस्तान, नेपाल या चीन नहीं...
आज देश का सबसे बड़ा और खतरनाक दुश्मन है आपके और हमारे शहरों, नगरों, गावों के बाजारों, सड़कों, गलियों और समाज में बिना सुरक्षा उपायों और मास्क के घूमते-मंडराते लोग. यही वो लोग हैं, जिन्होंने हमारा और आपका जीना हराम कर दिया है. यही वो लोग हैं जिनकी वजह से कोरोना नित नए चरम पर जा रहा है. बॉर्डर पर जो भी देश के दुश्मन हैं, वो तो साफ दिख रहे हैं और उनसे हमारे बहादुर सैनिक निपट ही लेंगे. पर हमारे बीच जो ये कोरोना आतंकवादी घूम रहे हैं, इसे तो सरकार गोली भी नहीं मार रही.
सावधान रहिये ऐसे लोगों से. यही देश के सबसे बड़े आतंकवादी हैं... कोरोना आतंकवादी.

Sunday, June 21, 2020

आज के दिन सब योगी हैं !

आज पूरी दुनिया में दो घटनाएँ एक साथ घट रही है.
पहला तो आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है और दूसरा साल का सबसे बड़ा सूर्यग्रहण चल रहा है. इस ग्रहण में हम 900 साल के बाद वलयाकार सूर्यग्रहण को देख सकेगें. अगला सूर्य ग्रहण शायद भारत में ग्यारह साल बाद दिखाई देगा, जो 21 मई 2031 को होगा, जबकि 20 मार्च 2034 को पूर्ण सूर्यग्रहण देखा जाएगा.
आज के दिन सब योगी हैं. योगी, भोगी, रोगी और भोयोगी सभी योग दिवस की शुभकामनाएं दें रहे हैं और अपनी फोटो सबके साथ शेयर कर रहे हैं. पर मेरे लिए 21 जून एक सामान्य दिन की तरह ही है. सूर्यग्रहण चल रहा है यही विशेष है. योग तो जीवन का हिस्सा ही है. फिर इसके लिए एक दिन योग दिवस मनाने की जरूरत मुझे महसूस नहीं होती. हाँ, ये दिन उनके लिए विशेष हो सकता है, जिनको पुरे साल इस दिन का इंतजार रहता है. ताकि योगाभ्यास करते हुए कुछ फोटो लेकर मित्रों को दिखा सकें. मतलब बस एक दिन योगाभ्यास कर ऐसे लोग पुरे साल उर्जा प्राप्त करते हैं.
एक दिन योग दिवस मनाकर, जीवन में कुछ हासिल होने वाला नहीं. इस योग दिवस को सफल तभी कहा जाएगा, जब हम इसे अपने दैनिक जीवन में स्थान दें. योग को जीवन का हिस्सा बनाइये, योग आपको निर्मल और स्वस्थ शरीर प्रदान करेगा.
जय हो !

Thursday, June 18, 2020

चलो Tik Tok... Tik Tok करें

लद्दाख के अभियंता और जाने-माने शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk).

चीन के साथ 44 दिनों से बढ़ते तनाव के बीच, लद्दाख में सोमवार को हुए खुनी संघर्ष में 20 भारतीय जवानों ने अपनी बलिदान दे दी. सेना के जवान दुर्गम क्षेत्र में जान की परवाह न कर भी डटी रहती है, ताकि हम सुरक्षित रह सकें. ताकि हम चायनीज TikTok पर वीडियों बना सकें, चाइनीज मोबाइल खरीद के साथ सस्ते सामान खरीदकर चीन की झोली भर सकें. उसी पैसे का इस्तेमाल दुष्ट चायनीज सरकार अपनी दुष्ट विस्तारवादी नीति के लिए कर सके. अपनी विस्तारवादी नीति के कारण ही आजादी के बाद से वो हमारी हजारों किलोमीटर जमीन हथिया चूका है, अब जब उसे कड़ा जवाब मिल रहा है. उसके डर से हमारे जवान पीछे नहीं हट रहे तो हमारे जवानों को धोखे से क़त्ल करने के लिए भिड़ा, ये अलग बात है कि हमारे जवानों ने एक के बदले दो को लुढका दिया और जैसे को तैसा जवाब दिया.  पर आप जारी रखों अपना TikTok. हाँ, अपना नया फोन भी चायनीज लेने की जो प्लानिंग कर रखी है. 
ले लो... हाँ... हाँ ले लो. अरे, सेना के जवान ही मरे हैं, हम थोड़े मरे रहे हैं. जो सेना और देश के बारे में सोचें. 


लद्दाख के अभियंता और जाने-माने शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) ने अपने यू ट्यूब चैनल पर चाइना के सामानों के बहिष्कार की अपील की थी. जिसका परिणाम ये हुआ कि चीन ने घबराकर गूगल प्ले स्टोर से चायना की एप्प्स को खोजकर बताने वाले भारतीय एप्प को हटवा दिया. पर इन सबसे आपको और हमको क्या लेना है. हम थोड़े ना सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को जानते हैं. हमें क्या करना उनके बहिष्कार की अपील की. आप लगे रहो अपने TikTok वीडियों पर. सोनम वांगचुक को कोई कामधंधा नहीं है, जो देश के बारे में सोचते रहते हैं. आप बढ़िया वीडियों बना रहे हो, लगे रहो. 
देश रहे या जाए, हमें क्या करना. 
अपना TikTok वीडियों और चायना का फोन जिंदाबाद. 


अब कई बहुत ज्यादा दिमाग वाले लोग ये भी कहेंगे कि सरकार तो कुछ कर नहीं रही हमारे बहिष्कार करने से क्या होगा. तो आपको बता दूँ सरकार क्या करेगी और क्या नहीं वो सरकार का मामला है और विदेश नीति के साथ व्यापार नीति का मामला है. पर हमें चीनी सामान के बहिष्कार करने में कोई नीति रोक नहीं सकती. वैसे बीएसएनएल के बाद रेलवे ने भी चीन की कंपनी के साथ 471 करोड़ का करार रद्द करने का फैसला ले लिया है है. रेलवे ने कहा है की काम की रफ्तार धीमी होने के कारण कॉन्ट्रैक्ट को रद्द कर रहे हैं. पर इससे हमें क्या करना है. हम तो Tik Tok बनाने में मस्त और व्यस्त हैं. वैसे कम अक्ल होने का यही तो प्रमाण हैं.

किसने कहा जो चीनी आइटम ले रखा है उसे तोड़ दो, फोड़ दो. अरे शुरुआत तो कर सकते हैं. चीनी सामानों को ना तो कह सकते हैं. आज एप्प को फोन से हटाने से शुरू करेंगे तो धीरे-धीरे फोन और अन्य उपकरण खरीदने के पहले ये देखने की आदत भी पड़ जायेगी कि वो चाइनीज ना हो. ऐसा भी नहीं है कि हम इन तीन फुटियें के सामान के बिना जीवन ही नहीं जी सकते. पर नहीं हमें क्या करना है. सबकुछ ऐसी ही चलता रहता है, अपनी ख़रीददारी जारी रखिये. सेना के जवान ही मरे हैं, हमें क्या करना.

हमारी खुफिया एजेंसियों ने 50 चाइनीज ऐप्स की लिस्ट जारी की है. जिन्हें देश और आपके सूचनाओं के लिए भी खतरनाक बताया गया है. इसमें सबसे पहले नंबर पर वही TikTok है, जिसमें मटक-मटक के आप वीडियों बना अपने मानसिक दिवालियेपन को दुनिया के सामने, खुद ही रख रहे हो. पर इससे भी हमें क्या करना है, चलिए हम फिर से मटक-मटक के एक नया वीडियों बनाते हैं. अरे उसी TikTok पर, जिसकी आपको लत पड़ चुकी है. दिमाग के अन्दर सिर्फ और सिर्फ घासफूस ना भरी हो, तो आप भी अपना मोबाईल चेक कर इस लिस्ट से मिला लो. उसके बाद क्या करना है वो आप खुद दो मिनट आँखें बंद कर सोचों, सोचो उस निहत्थे शहीदों के बारे में जिन्हें तीन फुतिये लोगों ने छल से मार डाला. जवाब खुद ब खुद मिल जायगा. अंत में बस एक प्रसिद्द शेर से अपनी बात ख़त्म करता हूँ-
कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों.

खुफिया एजेंसियों ने इन 50 खतरनाक चाइनीज ऐप्स की लिस्ट जारी की :

टिक-टॉक (TikTok)
हेलो (Helo)
यूसी ब्राउजर (UC Browser)
यूसी न्यूज (UC News)
शेयर इट (Sharit)
लाइकी (Likee)
360 सिक्योरिटी (360 Security)
न्यूज डॉग (NewsDog)
शिन (SHEIN)
विगो वीडियो (Vigo Video)
वी चैट (WeChat)
वीबो (Weibo)
जूम (ZOOM)
वीबो लाइव (Vibo live)
क्लब फैक्टरी (Club Factory)
शेंडर  (Xender)
ब्यूटी प्लस (BeautyPlus)
क्वाई (Kwai)
रोमवी (ROMWE)
फोटो वंडर (Photo Wonder)
एपीयूएस ब्राउजर (APUS Browser)
वीवा वीडियो (VivaVideo)
क्यूयू वीडियो इंक (QU Video Inc)
परफेक्ट कोर्प (Perfect Corp)
सीएम ब्राउजर (CM Browser)
वायरस क्लीनर (Virus Cleaner)
हाई सिक्योरिटी लैब (Hi Security Lab)
एमआई कम्यूनिटी (Mi Community)
डीयू रिकाॅर्डर (DU recorder)
यूकैम मेकअप (YouCam Makeup)
एमआई स्टोर (Mi Store)
डीयू बैटरी सेवर (DU Battery Saver)
डीयू ब्राउजर (DU Browser)
डीयू क्लीनर (DU Cleaner)
डीयू प्राइवेसी (DU Privacy)
क्लीन मास्टर (Clean Master)
बैदू ट्रांसलेट (Baidu Translate)
बैदू मैप वंडर कैमरा (Baidu Map Wonder Camera)
ईएस फाइल एक्पलोरर (ES File Explorer)
क्यूक्यू इंटरनेशनल (QQ International)
क्यूक्यू लाॅन्चर (QQ Launcher)
क्यूक्यू सिक्योरिटी सेंटर (QQ Security Centre)
क्यूक्यू प्लेयर (QQ Player)
क्यूक्यू म्यूजिक-क्यूक्यू मेल (QQ Music QQ Mail)
क्यूक्यू न्यूज फीड (QQ NewsFeed)
वी सिंक (WeSync)
सेल्फी सिटी (SelfieCity)
क्लैश ऑफ किंग्स मेल मास्टर (Clash of Kings Mail Master)
एमआई वीडियो काॅल-शाओमी (Mi Video call-Xiaomi)
पैरेलल स्पेस (Parallel Space)

Sunday, June 14, 2020

सूसाइड और हमारा समाज


एक्टर सुशांत सिंह राजपूत का इस तरह सूसाइड कर लेना, बहुत दुखद खबर है. श्रीमती ने अभी बताया, उन्हें भी बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाते वक्त शायद वीडियों दिख गया. मैं तो समाचारों से मतलब ना के बराबर ही रखता हूँ. समाचार ऑनलाइन सर्च किया तो पता चला कई हित फिल्मों में अभिनय कर अपनी धाक जमा चुके थे. मैं फ़िल्में देखता नहीं, इसलिए नाम से भी वाकिफ नहीं था. हाँ, यहाँ-वहाँ फिल्म के पोस्टर पर कई बार ये चेहरा देख चूका था.

डिप्रेशन या अवसाद किस कदर लोगों को लील रहा है. ये इसका उदाहरण है. कोरोना काल में लम्बे समय तक घरों में बंद होने से इसे और सबल मिला. एक्टर सुशांत सिंह राजपूत जैसे एक्टर का ऐसा करना, दर्शाता है कि लोग अपनी स्ट्रेस को मैनेज नहीं कर पा रहे हैं. लोगों को ये पता नहीं कि हाई लेवल के स्ट्रेस को कैसे मैनेज करें. कोरोनाकाल के लॉक डाउन में कई लोगों को फ्री सलाह दी. कई मित्रों ने इसका फायदा उठाया और आज खुश हैं. बार-बार धन्यवाद कहते हैं. अवसाद से निकलने और जीवन के हारते पल में बस एक तिनके का सहारा भी काफी होता है. 

हम सबकुछ करते हैं, सीखते हैं. पर भारत में कुछ चीजों पर कोई सीख ना समाज से मिलती है और ना परिवार से. एजुकेशन सिस्टम की तो बात करनी ही बेकार है. भारत में सबसे पहली चीज, जिसपर कोई बात करना नहीं चाहता वो हैं पैसा. मतलब मनी मैनेजमेंट पर कोई बात करना नहीं चाहता. पैसे पर बात करना भारत में एक टेबू है. जिस तरह से सेक्स पर बात करना एक टेबू है. सेक्स और उससे जुडी समस्या भारत में सबसे गंभीर रूप इसलिए ले लेती है. कोई खुलकर इसपर बात करना तो क्या, सोचना तक नहीं चाहता.

उसी कड़ी में स्ट्रेस भी एक विषय है, जो ऊँचे-ऊँचे खवाब, कामयाबी और भागदौड़ भरी जिन्दगी में बेहिसाब बढ़ रही है. पर स्ट्रेस मनेजमेंट कैसे करें, ये अधिकतर लोग समझ नहीं पाते. मैं हमेशा इस बात पर बल देता हूँ की हर इंसान को अपने अन्दर दबे पड़े हॉबी, हुनर, शौक की खोज करनी चाहिए. जिसे एक जूनून की तरह पालना चाहिए. बिना किसी शौक या हॉबी और हुनर क्या इन्सान को सच में इन्सान कहा जा सकता है. मैं हमेशा कहता हूँ, ऐसे इन्सान दोपाया जानवर से ज्यादा कुछ नहीं. कई लोगों को बहुत बुरा है. पर सच्चाई यही है. यही बेहिसाब बढ़ते स्ट्रेस को मैनेज करने का मैजिक फार्मूला है. इसके साथ एक्टिव लाइफ स्टायल जीना भी बेहद जरुरी है. हमेशा एक्टिव रखिये खुद को. एक्टिव पर्सनालिटी के लोग कभी स्ट्रेस से डिप्रेशन में नहीं जा सकता. डिप्रेशन अधिकतर सुस्त और आलसी लोगों को अपने चपेट में लेता है. पुरे दिन बिस्तर पर पड़े रहना, टीवी के सामने बैठे रहना ये सब सुस्त और आलसीपन के ही लक्षण हैं.

योग को जीवन का एक हिस्सा बनाए. योग जीवन के हर मोड़ पर, हर असफलता को अपनाना सिखाता है. योगाभ्यास से स्ट्रेस और डिप्रेशन को बहुत ही आसानी से मैनेज किया जा सकता है. योग और वाक से स्ट्रेस लेवल आश्चर्यजनक रूप से कम किये जा सकते हैं. पर सबसे जरुरी बात ये है की इसके लिए कदम आपको खुद ही उठाना पड़ेगा. ये सब कोई दूसरा आपके लिए नहीं करेगा. जीवन लीला समाप्त कर लेना भी बहुत आसान फैसला नहीं है. मैं तो मानता हूँ सूसाइड करने के लिए भी बड़ा कलेजा चाहिए. इसी हिम्मत को अगर जीवन के उस स्ट्रेस, अवसाद, परेशानी से लड़ने में लगा दें, तो जरुर कामयाबी मिलेगी. पर लोग हमेशा शार्टकट की ओर भागते हैं और जीवन लीला समाप्त कर लेना ही आसान रास्ता नजर आता है.


अपने लाइफ स्टाइल को ठीक करिए, एक्टिव रहिए. जीवंत और एक्टिव बनने के साथ परिस्थिति के साथ चलना सीखिए. अपने हॉबी, शौक की खोज करिए अगर आज तक नहीं खोज पाए. हर किसी का कोई ना कोई शौक या हॉबी होता है, जो जीवन के भागदौड़ में कहीं दम तोड़ देते हैं. आपकी शौक या हॉबी मूड बूस्टर की तरह होते हैं, जो आपको रिचार्ज कर देते हैं. 

श्रीमद्भागवतगीता को अपनाइए. मेरा तो मानना है गीता MBA, इंजीनियरिंग जैसे हाइयर एजुकेशन में एक विषय के रूप में शामिल होना चाहिए. कोशिश कीजिये, एक गीता हमेशा आपके पास हो. डायरी से भी छोटी साइज में गीता प्रेस की गीता हिंदी, अंग्रेजी के साथ कई अन्य भारतीय भाषों में उपलब्ध है. आज भी गीता उतना ही सबल आपको और हम सबको दे सकता है, जितना युध्भूमि में इसके ज्ञान ने अर्जुन को सबल दिया था. इसे जीवन का अंग बनाइये, पढ़िए. गीता जीवन के हर मोड पर रास्ता दिखाने में सक्षम है. 

Friday, June 12, 2020

स्लिम और फिट शरीर पाने का राज.

आश्रम जीवन और मैं 

आज एक दिलचस्प वाक्या आपलोगों के सामने रखना चाहता हूँ.

कुछ लोग ही शायद जानते हों मेरा जुड़ाव योग से दो दशकों से सीखने और सीखाने से रहा हैं. वैसे तो पिताश्री मेरे जन्म के पहले से ही योग के दो बड़े स्तम्भ शिवानंद आश्रम, ऋषिकेश और बिहार योग विद्यालय, मुंगेर से डायरेक्ट जुड़े रहे. और परिस्थितयों बस मैं सन 2001 में बिहार योग विद्यालय से, दिल्ली के भौतिक जीवन और आईटी में महारथ हासिल करने और काम करने के बाद कनेक्ट हुआ. बचपन में आना-जाना होता रहा, पर वो सिर्फ एक आउटिंग होती थी मेरे लिए. कुछ साल आश्रम के कठिन अनुशासन में रहा. वही रहते हुए इच्छा हुई तो योग मनोविज्ञान में डिप्लोमा कर लिया. योग पिताश्री के लिए जीवन पद्धित थी और उसे मैं भी अपनाने की कोशिश करता रहता हूँ. इतना बताना इसलिए जरुरी था, ताकि बाकि बात आपको समझ आ सके.

योग सीखने के लिए आज तक जो भी लोग मुझ से जुड़े, पहली मुलाकात में दो-चार को छोड़कर सबकी पहली इच्छा यही होती कि वो मेरे जैसे फिट और स्लिम दिखें. अब आप कहोगे दो-चार को छोड़कर क्यों ? तो बात ये थी कि वो दो-चार लोग पहले से ही फिट और स्लिम थे और ओवरआल वेलबीइंग के लिए योग से जुड़े थे. दिल्ली हो या भागलपुर सबके सब हाई सोसाइटी वाले रहे. मेरा अनुभव रहा है, मध्यम वर्ग या निम्न वर्ग के लोग सिर्फ रोग ग्रसित होने पर ही योग की शरण में आता है. उसके पहले उनके लिए योग बकवास है.

फिर बात पहुँचती खानपान पर और लोगों का आंकलन होता “आप तो सिर्फ खिचड़ी और दलिया खाते होंगे”, इसलिए इतने फिट और स्लिम हैं. पहली मुलाक़ात में सिर्फ इतना कहता एक-एक स्टेप फॉलो करो और फिर आपकी इच्छा जरूर पूरी होगी. हो सकता है खानपान में थोडा जोड़-तोड़ करना पड़े पर मैं ये मत खाओ, वो मत खाओ नहीं कहूँगा. मैं खुद एक फूडी हूँ. लोगों को लगता, वाह बैठे बिठाए अलादीन का चिराग हाथ लग गया. खूब खुश हो जाते. 

फिर अगले सेशन में बात होती, क्या करना है.

· रात को जल्दी सोना होगा... (अगर रात में काम पर जाते हों तो एक अलग बात है.)
· सुबह सूर्योदय के पहले या कम से कम साथ उठाना होगा.
· सुबह या शाम कम से कम 4-5 किलोमीटर का वाक प्रतिदिन होना ही चाहिए.
· नियमित एक घंटा बताया और कराया गया योगाभ्यास.
· रात्रि के खाने के बाद, कम से कम एक किलोमीटर धीमी चाल में वाक.

इतना सुनकर लोगों का सर भारी हो जाता. इतना सब आप करते हो, हमसे तो ना हो पायेगा... 
ऐसे में सिर्फ इतना ही कहता हूँ - एक तंदरुस्ती हजार नियामत

इसके साथ खानपान के कुछ नियम भी, जो कभी बाद में बताऊंगा. ज्यादा लम्बा लिख दिया तो आपलोग तो पढोगे नहीं, दो-दो लाइन के चुटकुले पढने की आदत जो हो गई है.

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