पिछले कुछ दिनों में, मेरे मित्रों ने मुझे कुछ सलाह दी. मित्रों की सलाह देखिये -
पहला मित्र योग से जुड़ा है -
"ये आजकल क्या करते रहते हो, कभी नैनीताल, कभी भीमताल, कभी मेघालय, कभी सिक्किम. भाई योग की बात करो, हम सिर्फ योग को फॉलो करते हैं.... गुरु जी की बात करो."
मैं हाथ जोड़कर - अब ऐसा ही करूँगा गुरुभाई.
दूसरा मित्र मेरे पर्सनल फाइनेंस के जानकारी की वजह से जुड़ा था मुझसे -
"अबे ये क्या करता रहता है, फाइनेंस तो नजर ही नहीं आ रहा है तुम्हारी पोस्ट में. कुछ insurance ही बिकवा दो, तेरा भी फायदा होगा."
मैं हाथ जोड़कर - ठीक है अब से insurance ही बेचूंगा.
तीसरा मित्र काफी पुरानी जान पहचान है-
"ये क्या करते रहते हो? कभी योग, कभी ट्रेवल, कभी कविता, कभी पर्सनल फाइनेंस, कभी राइटिंग, कभी फोटोग्राफी, तो कभी बागवानी, कभी नेचर तो कभी कुकिंग. यार इतना समय और जानकारी कहाँ से लाता है. मुझे समझ ही नहीं आता तू क्या है."
मैं - फिर क्या करूँ ?
"यार एक ही फील्ड पर टिके रहो, ये रेलवे के ट्रेन की तरह ट्रेक मत बदलते रहो."
मैं हाथ जोड़कर - ठीक है मैं बस अपनी नौकरी के अलावा कुछ नहीं सोचूंगा अब आगे से.
चौथा मित्र, जो मेरे कई सारे ट्रेवल देखकर जलाभुना जा रहा है-
"क्या है ये www.yayavarektraveler.com? उसकी बात करो जिससे कुछ समाज का भला हो. जब देखो घुमने-फिरने की बात करते रहते हो. पैसे खर्च होते हैं घुमने में भाई, वो कौन देगा?"
मैं हाथ जोड़कर - भाई ऐसा है तुम मरो अपने पैसे के साथ, मुझे जो अच्छा लगता है करता हूँ. वैसे एक बात बताओ, ये मेरे घुमने, मेरे वेबसाइट और मेरे घर को चलाने को तुम डोनेसन देते हो क्या मुझे?
चौथा मित्र तिलमिला उठा-
"यार, तेरी ऐसी पोस्ट देखकर पेट में बहुत भारी गैस बन जाती है मुझे, कलेजा जलने लगता है."
ये सब एक सप्ताह में घटित घटनाक्रम पर आधारित है. मैं अपने जवाब में अंग्रेजी की एक phrases कहना चाहता हूँ -
“I'm jack-of-all-trades, master of none”
मुझे अपनी जिन्दगी जीनी है, अपने सपनों के साथ मरना नहीं जीना चाहता हूँ, तो जो अच्छा लगता है करता हूँ. और मेरे भाई नीली छतरी वाले ने ही मुझे Multi Skilled बनाया तो इसमें मेरा क्या दोष.
अंशुमान चक्रपाणि का दशकों पुराना ब्लॉग नक्कारखाना (Nakkarkhana), विचारों के सैलाब को शब्द देने का एक माध्यम है.
www.Nakkarkhaanaa.blogspot.com
Wednesday, November 20, 2019
I'm jack-of-all-trades, master of none
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प्रेरक,
विचार-विमर्श,
व्यंग्य
नक्कारखाना खुद को स्वछंद अभिव्यक्ति करने का माध्यम है. मुझे पूज्य पिताश्री से पढ़ने और लिखने का शौक विरासत में मिला, ये बात अलग है की मेरी लेखनी में उनके जैसा पैनापन और लोगों को बांधे रखने की कूबत नहीं.
नक्कारखाना एक छोटा-सा प्रयास है अपने अंतर्मन में उबलते विचारों को लिपिबद्ध करने का और दिल में जल रहे गुस्से के भड़ास को निकालने का. आपको मेरा ये प्रयास कैसा लगा जरूर बताये, आपकी प्रतिक्रियाओं का मुझे इन्तजार रहेगा|
-धन्यवाद.
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