Tuesday, May 12, 2020

कोरोना कुछ सकारात्मक भी सीखा रहा

Say Yes to घर का खाना (Home Made Foods)

कुछ मित्रों से बात हुई. लोग कई तरह के परेशानियों का सामना कर रहे हैं और हर कोई अपने को जैसे-तैसे एडजस्ट कर इस महामारी के दौड़ के बीत जाने की प्रार्थना कर रहा है. परेशानियों की अगर लिस्ट बनाई जाएँ तो कई लोगों की लिस्ट रामायण से भी मोटी हो सकती है. मेरे जैसे कुछ लोग ही सही, पर होंगे जरुर, जिन्हें विरासत में "सदा जीवन उच्च विचार" की थाती मिली हो. ऐसे परिवार में किसी भी सदस्य को इस बुरे दौड़ में कुछ भी असहज नहीं लग रहा. बच्चों के स्कूल बंद होने के अलावा, सबकुछ सामान्य है, जीवन एकदम शांत और सहज है. 

इस माहामारी ने "सादा जीवन" का मंत्र से सबको अवगत करा दिया है, हम बिना शौपिंग के, बिना सिनेमाघरों के भी जी सकते हैं. हम बिना आउटिंग और होटलबाजी के भी जी सकते हैं. हम बिना पिज्जा-बर्गर के भी जी सकते हैं. हम बेमतलब दिनभर बाहर समय व्यतित किये बिना भी जी सकते हैं. मतलब इस माहामारी के दौड़ में प्रकृति के द्वारा दी जाने वाली चेतावनी और सीख के साथ आगे जिन्दगी जिए तो शायद हमारा जीवन थोडा सरल और पर्यावरण के अनुकूल हो. 

इस माहामारी ने हमें सिखाया कैसे बाजार पर निर्भरता कम कर भी लोग मजे से जी सकते हैं. घरों में बंद लोग तरह - तरह के पकवानों को आजमा रहे हैं, अपने घर की साफ सफाई खुद कर रहे हैं. मिठाइयों के लिए हलवाइयों पर निर्भर रहने के बजाए लोग कुछ ना कुछ खुद बनाने की कोशश कर रहे हैं और ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने इस महामारी के पहले ऐसा कभी नहीं किया था. इसी सोच को लॉक डाउन ख़त्म होने के बाद भी आगे जिन्दा रखने की जरूरत है. बाहर के खानपान पर निर्भरता कम कीजिये, घरों में शुद्द, स्वच्छ और सेहत के लिय वरदान साबित होने वाला जो नुस्खा इस कोरोना की वजह से मिला है, इसे जीवन में आत्मसाद कीजिये.  

बाजारवाद पर हमें जीत हासिल करनी होगी, कुछ हद तक ही सही. ज्यादा से ज्यादा खानपान होममेड करने की कोशिश कीजिए, चाहे वो कोई भी पकवान हो या मिठाई. हमारे घरों में ये एक परंपरा ही है. माताजी के बाद  श्रीमतीजी ने भी इस परंपरा को खूब निभाना सीख लिया है और आप भी अपने घरों में आजमाकर देखिये. ये थोडा मुश्किल हो सकता है, नामुम्किल बिलकुल नहीं.

Monday, May 11, 2020

कोरोना और कामचोर-निकम्मे सरकारी कर्मचारी


क्या सेना को घर बैठने की इजाजत दी गई है?
क्या मेडिकल स्टाफ के साथ डॉक्टर घर में बैठे हैं ?
क्या सिर्फ पैसेजर ट्रेन बंद होने से ऑपरेशन और मेंटेनेंस में लगे रेलवे कर्मी घर में बैठ गए हैं?
क्या पैरा मिलट्री फ़ोर्स और पुलिस वाले घरों में बंद हैं ?
क्या हमारे घरों में निर्बाध बिजली पानी पहुँचाने वाले और सफाईकर्मी घर में सो रहे हैं?
नहीं, घर में सो रहे हैं वो, जो अपने को देश कर कर्णधार मानते थे. घर में सो रहे कॉर्पोरेट के लोग, घर में सो रहे हैं प्राइवेट ट्रांसपोर्ट वाले. घर में सो रहे प्राइवेट हॉस्पिटल वाले, प्राइवेट डॉक्टर जो हजारों में फ़ीस वसूलते थे. घर में सो रहे वो लोग, जो दिन रात इन सरकारी कर्मचारियों को कोसते और गलियां देते थे और बस दो महीने पहले ही ये चाहते थे कि सबकुछ प्राइवेट के हाथों में बेच दिया जाएँ.
और काम कर रहे सिर्फ और सिर्फ वही कामचोर और निकम्मे सरकारी कर्मचारी. काश, सरकार कोरोना के आने के पहले रेलवे के कॉर्पोरेट के हाथों बेच देती और साथ ही साथ सरकारी हॉस्पिटल भी बंद करवा देती. तो आज देखा का नक्शा, सबकुछ बेचने को आतुर सरकार भी ना पहचान पाती.
#घरमेंरहियेसुरक्षितरहिये

Sunday, May 10, 2020

माई बाप कई दिनों से खाना नसीब ना हुआ...

दो दिन पहले दिल्ली के एक महिला मित्र से बात हुई. पता चला गाजियाबाद एक्स में उनके फ्लैट के पीछे लोगों ने झुग्गी लगा रखा है और वो दिनभर बैठकर उस झुग्गी में हो रहे तमासे को देखकर अपने लॉक डाउन का आनन्द ले रही हैं.

मुझे आश्चर्य हुआ. ऐसा क्या हो रहा है उस झुग्गी में, जो आप पूरी लॉक डाउन में झुग्गी से आनन्द प्राप्त कर रहीं हैं? फिर उसने जो कहानी सुनाई उसे सुनकर तो मुझे समझ ही नहीं आ रहा था उसके साथ मैं पेट पकड़ कर हंसू या ऐसे लोगों का व्यवस्था का मजाक उड़ाने के लिए रोऊँ.  

जैसे उसने बताया...
सुबह 9 बजे कुछ लोग गाड़ियों में खाना भर भर कर आते हैं, इन गरीबों को खिलापिला कर एक घंटे में गाड़ी खाली कर जाते हैं.

11 बजे फिर से सरदार जी लोग आ जाते हैं और प्रेम से एक-एक को नाक - मुंह तक ठूस-ठूस कर खिलाते हैं.

1 बजे फिर सरकारी लाव-लश्कर आता है, ये लोग फिर से भूखे-नंगे की तरह खाते हैं.

3 बजे फिर से कोई NGO खाना लेकर आ जाता है. वही सारे बेचारे जो सुबह से भूखे हैं, फिर से खाते हैं.

इसके बाद भी कई लोग सुखा राशन-पानी देकर जाते हैं. ये लोग उसे भी लेकर गरीब होने का धर्म निभाते हैं.

शाम को फिर से लोग आते हैं खाना लेकर और रात का खाना खिला जाते हैं. ये बेचारे गरीब लोग, कल से खाना नहीं खाया ऐसा बोलकर फिर से दो - तीन लोगों का खाना अकेले खा जाते हैं.

रात होने के पहले जब कुछ मीडिया वाले पहुँचते हैं, तो यही जो लोग दस दिनों का खाना एक दिन में गटक चुके हैं. मीडिया के सामने ऐसा रोना रोते हैं, ऐसा रोना रोते हैं. जिसे टीवी पर घरों में बैठकर देखने वाले भी रो पड़ते हैं. कोई कह रहा है - "माई बाप कई दिनों से खाना नसीब ना हुआ", "कोई आरोप लगा रहा है यहाँ तो आजतक कोई आया ही नहीं"

जहाँ एक ओर लोग भूखे मरने को मजबूर हो रहे हैं, वही कुछ ऐसे भी नज़ारे सामने आ रहे हैं. हो ये रहा है, जो क्षेत्र पहुँच में हैं, नजदीक है वहाँ लोग पहुँच जाते हैं और ऐसे गरीब लोग जिनका पेट शायद FCI के गोदामों में जमा सारे अनाज को खाकर भी ना बुझे, वो इसका नाजायज फायदा उठा रहे हैं या यूँ कहे की पीड़ित होने का ड्रामा कर कई और भूखे लोगों के पेट पर लात मारकर सारा खाना और राशन हजम कर ले रहे हैं.

Saturday, May 9, 2020

सरकार एक मदारी, कोरोना जमूरा और हम और आप दर्शक -2




जैसा कि कल बताया था, दो घटनाओं के बारे में. दोनों घटनाओं से आपको एक-एक कर अवगत करवाऊंगा कहा था. पर कल एक घटना ही आपके सामने रख पाया, जिसे आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं - https://nakkarkhaanaa.blogspot.com/2020/05/blog-post.html, तो आज बात दूसरी घटना की. लोग घरों में बंद हैं, मज़बूरी भी है. इधर दिन रात लगातार आपको कोरोना का समाचार मिल रहा है और सरकार के समर्थक वाह - वाह करते नहीं थक रहे कि सरकार बेहतरीन काम कर रही है. सरकार तो सरकार है जी,  जिस तरह बाकि चीजों में आज तक सीरियस रही है वैसे भी कोरोना से लड़ने में सच में सिरियस है. इसमें आप और हम दोष देंगे सेवा देने वाले को जो आपको सामने दिखेगा... डॉक्टर, नर्स, मेडिकल स्टाफ, पुलिसकर्मी. ये लोग आपको सामने दिख रहे तो कुछ लोग इनके काम की सराहना भी कर रहे हैं और करना भी चाहिए.

पर असल समस्या ये सेवा देने वाले नहीं है, जिसपर आप और हम लापरवाही का सारा दोष लगाते हैं. समस्या है सिस्टम में और वो भी ऊपर से.

दूसरी घटना
जैसा कि कहा जा रहा है बाहर से आने वाले को 14 दिनों तक अलग रखा जायेगा, मतलब कोरोंनटाईन किया जायेगा. ये भारत सरकार का आदेश है जिसे हर राज्य को मानना है. जैसा कि आपलोगों को भी जानकारी में होगा कि कोटा से छात्रों और छात्राओं को लेकर रेलवे की श्रमिक गाड़ी दानापुर 2 मई, 2020 को पहुंची. सभी यात्रियों की पूरी तामझाम के साथ स्वागत किया गया. ट्रेन से उतरते के बाद सेनेटाईज कर स्क्रीनिंग की गई. सबकुछ पुरे कड़ाई से किया गया. इसके लिए आपके साथ मैं भी ताली बजाने को तैयार हूँ. अच्छे काम की तारीफ तो करनी ही चाहिए.

अब आप सोच रहे होंगे क़ी राजस्थान से आने वालों 1200 यात्रियों को तो सरकार पूरी कड़ाई से कोरोंनटाईन सेण्टर ले जाकर रखेगी. होना भी यही चाहिए था. पर हुआ कुछ और. 

क्या हुआ मालूम है आपको? शायद नहीं.
सरकार ने सारे  छात्रों और छात्राओं को सिर्फ स्क्रीनिंग कर सबको अपने - अपने जिले भेज दिया और सभी  छात्रों और छात्राओं को अपने जिले पहुँचने के बाद अपने - अपने घर भेज दिया गया. हमारे आसपास के घरों में ही दर्जनों  छात्र-छात्राएं अपने घर को लौट आए और खुश हैं कि वो अपने घर पहुँच गए.

अब आप इस घटना से अंदाजा लगा लीजिए किस तरह का संकट बाहर से आने वाले श्रमिक आयर  छात्र-छात्राएं लेकर आपके और हमारे आसपास पहुँच चुके हैं. और मुझे पूरी उम्मीद है श्रमिक गाड़ियों से आने वालों लाखों लोगों का भी हाल यही होगा. आने वाले दिनों में श्रमिक गाड़ियों से मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, उड़ीसा को सिर्फ और सिर्फ सर दर्द मिलने वाला है, अगर आने वालों के साथ बिहार सरकार की तरह ही लापरवाही हर जगह की जा रही होगी.

अब आप ही सोचिये क्या मैंने सच नहीं कहा कि कोरोना के नाम पर सिर्फ नौटंकी चल रही है, जिसमें सरकार एक मदारी, कोरोना जमूरा और हम और आप दर्शक मात्र हैं.

अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी


सफ़र से नाता काफी नजदीकी रहा है. मेघालय और आसाम यात्रा पर था तो ट्रेन में सफ़र के दौरान एक बात पर ध्यान गया. बात बिल्कुल सामान्य है, सबने देखा-सुना होगा. ट्रैनों में खाने में अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी ही हमें सबसे ज्यादा बिकते दिखते हैं. जब देखो तो अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी की आवाज आती रहती है.
अंडा बिरयानी..... अंडा बिरयानी.....
वेज बिरयानी..... वेज बिरयानी.....


ऐसा प्रतीत होता है मतलब अंडा बिरयानी को रेलवे ने एक धरोहर की तरह संरक्षित किया हुआ है. मुझे तो ऐसा लगता है रेलवे को इसका पेटेंट ले लेना चाहिए. रेलवे की खानपान (पैंट्री सेवा) को नॉवेल पुरूस्कार प्रदान किया जाना चाहिए. आपको अगर इस विलुप्त व्यंजन को खाना हो तो दुनिया में कहीं अंडा बिरयानी न मिले तो निकल पड़िए किसी भारतीय रेल के सफर पर और मजे लेते रहिए अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी का. भले हो सकता है वो एक दिन पहले की बची चावल की बनी हो, पर अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी को पसंद करने वालों को इस बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत ही नहीं स्वाद लेते रहिए बिल्कुल विलुप्तप्राय रेसिपी अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी का.

वैसे मुझे लगता है इस रेसिपी को पसंद करने वालों और खरीदकर पूरे का  पूरा चट कर जाने वालों को भी वीर चक्र या शौर्य चक्र तो मिलना ही चाहिए. मतलब जिगर होना चाहिए यार, इसे पूरी तरह खाने के लिए. लेकिन बात ये भी है कि आपकी जेब से पैसे चले गए, बेकार सा अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी आपके सामने आपको मुहं चिढाने लगे तो कोई भी महारथी जो करेगा वो यही होगा कि उसकी जान ले ली जाएँ. और अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी की जान तो प्लेट को पूरी तरह साफ कर चट कर जाने के बाद ही जाएगी. 

हाँ, अगर आपकी किस्मत बिल्कुल गणेशजी ने खुद अपने ही हाथों से लिखी हो और आपको बिल्कुल मस्त आइटम हाथ लग गया, मतलब बिल्कुल फ्रेश अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी मिल गया हो तो, इसे स्वर्ग भोग ही समझिए. और इससे कम की कोई गुंजाईश ही नहीं.
क्या कहते हो आप ?

बात ठीक लगे तो शेयर भी कर लीजिए, ताकि बाकी लोग जो अभी तक अंडा बिरयानी और वेज बिरयानी का स्वाद से अनजान हो, वो भी इसका भोग लगा सके और अपने जीवन को धन्य कर सकें.

Friday, May 8, 2020

सरकार एक मदारी, कोरोना जमूरा और हम और आप दर्शक

कल दो घटनाएँ हुई. दोनों घटनाओं से आपको एक-एक कर अवगत करवाऊंगा. दृष्टांत थोड़ी लम्बी हैं पर ध्यान से पढ़िए. जिनको भी लगता है सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है वो लोग डॉक्टरों, नर्सों, हॉस्पिटल में तैनात स्टाफ, पुलिसकर्मी, सीआईएसफ, सीआरपीफ और सेना के जवानों के मरने की खबर की बिहाइंड द न्यूज़ को समझने का प्रयास कीजिये. और ऐसी हजारों लोगों की मौत से ना सिर्फ आप बल्कि सरकार तक भी अनजान हैं अभी. और इसका सिर्फ और सिर्फ एक कारण है सुरक्षा के बिना किसी उपायों के ये लोग काम कर रहे हैं. ये मामला ठीक वैसे ही है जिसे किसी युद्ध में सेना को उतार तो दिया जाये, पर उसके पास लड़ने को बंदूकें और तोपें ना हों.
पहली घटना पहली घटना ये कि हैदराबाद से 1200 लोगों को लेकर एक श्रमिक गाड़ी नाम की ट्रेन डायरेक्ट भागलपुर आई, जिसमें खगड़िया, बेगुसराय, पूर्णियां, कटिहार, मुंगेर, मधेपुरा और ना जाने कहाँ कहाँ के लोग, जो निसंदेश पीड़ित थे, अपनी धरती को दुबारा देखने और जमीन को छूने का सौभाग्य प्राप्त हुआ. स्टेशन पर सुबह से 7 बजे से कड़ी व्यवस्था थी. बिलकुल कड़ी ... एक परिंदा भी बिना आदेश फरफरा नहीं सकता था. डॉक्टर्स की टीम, सेनेटाईजर वाहन, बसों की लम्बी कतार जिसमें मैंने सुबह ही 8 बजे तक 36 बसों को स्टेशन के बाहर खड़े देखा था. सबकुछ हो रहा था जो होना चाहिए... और साथ में हो रहा था समाचार का लाइव कवरेज. आखिर मिडिया को चौथा स्तंभ कहा जाता है तो वो कैसे पीछे रहते. खचाखच फोटोग्राफी, समाचारों का प्रसारण. गाड़ी सुबह 8:10 बजे आने के कई घटे विलम्ब से दोपहर के 1:40 पर आई. ट्रेन से सारे दरवाजों को बंद करवा दिया गया और एक-एक पसेंजर को उतारा गया और स्क्रीनिंग (जिसका मैं सदा से नौटंकी कहता आया हूँ, किया गया) करके एक - एक पैसेंजर को सेनेटाईज कर, एक पानी की बोतल और एक खाने का पैकेट सम्मान के साथ देकर, सबके लिए जिले अनुसार निर्धारित बसों में भेज दिया गया. यहाँ तक मिडिया पल पल की खबर ले और दे रही थी. अब आते हैं असल मुद्दे पर. यहाँ तक तो जो हुआ उसे देखकर आप सरकार की जयकारे लगाने लगेंगे. पर असली खेल बिहाइंड द कैमरा शुरू हुआ. बसों में जरूरत से ज्यादा लोगों को भर दिया गया, जिससे सोशल डिस्टेंस भागलपुर स्टेशन पर ही तेल लेने चली गई. और उसके बाद इसमें से कितने लोग कोरोंटाईन शिविर में रहेंगे ये ना आप जान पाएंगे और ना मैं. जब हॉस्पिटल से संदिग्ध पोजेटिव केस वाले लोग भाग जा रहे हैं, तो क्या गाँव के लोग जिनके सर पर इन बाहर से आने वालों का बोझ दे दिया, जिसमें 20% लोग जरुर संक्रमित होंगे. क्या संभाल पाएंगे उनको ? जरा सोचिये. बस को उनके गाँव तक पहुंचा कर सरकार का दायित्व ख़त्म. उसके बाद गाँव वाले जाने. बात यही ख़त्म नहीं हुई, अब सरकार तो बड़े बैंड बाजे के साथ आपको बता रही है की ट्रेन को सेनेटाईज किया जा रहा है. ऐसी किसी भी ट्रेन को एक इस्तेमाल के बाद कम से कम 7 दिनों के लिए ह्यूमन टच से दूर रखना था. पर हुआ ये कि 24 डब्बे के ट्रेन को आधे घंटे से भी कम समय में सिर्फ एक कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले पंप से सेनेटाईज घोषित कर दिया गया. और उसे मेंटेनेस के लिए भेज दिया गया. जहाँ उसे सरकार के तानाशास अफसरों के आदेश को मानते हुए सरकारी गुलामों ने मेकनिकल और इलेक्ट्रिक वर्क का काम किया और करवाया. वो भी बिना किसी सुरक्षा उपायों के. ये है अलसी बिहाइड द सीन सरकारी काम. जिससे कारण कोरोना के संक्रमण पर लगाम नहीं लग रहा है. सबकुछ बड़े तामझाम से होता है, पर जो होना चाहिए वही नहीं होता. जरा सोचिये, एक अटैच बाथरूम वाले कमरे को लाइजोल, साबुन और फिनाइल मिक्स कर फ्लोर, खिड़की और दरवाजों के साथ बाथरूम के दीवारों तक को साफ करने में 40 दिनों तक मैंने हर दिन 30 मिनट से ही अधिक समय लगया था. पर इससे भी कम समय में मात्र एक बन्दे ने 24 डब्बों को सेनेटाईज कर दिया. बाकि उस मशीन में पानी से साथ सिर्फ पानी था या कुछ और इसमें भी मुझे संशय है.

Tuesday, March 24, 2020

भारत सरकार के साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की हेल्पलाइन


कोरोना वायरस व्यापक पैमाने पर भारत में फ़ैल चूका है. लोगों की जान जा रही है. संयम बरते और घरों में सेफ रहे. फिर भी जो लोग सरकारी सेवा में हैं, उनको इस वायरस का सबसे ज्यादा खतरा है. सतर्क और साफ रहें, इससे ज्यादा आपके पास सुविधा नहीं है.

भारत सरकार ने covid-19 महामारी को रोकने के लिए देश व्यापी Lockdown घोषित किया हुआ है. फिर भी कुछ लोग इसकी अवहेलना कर, अपने साथ दूसरों की जान को भी दाव पर लगा रहे हैं.

covid-19 के लिए भारत सरकार के साथ सभी राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किया है. यहाँ से जरूरी जानकारी के साथ सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है.

भारत सरकार की हेल्पलाइन सेवा :
Helpline: +91-11-2397 8046
Email: ncov2019@gmail.com


राज्यों के साथ केंद्र शासित प्रदेशों की हेल्पलाइन नंबर :

Andhra Pradesh
24x7 control room — 0866-2410978 or dial 104

Andaman and Nicobar Islands
Helpline: 03192- 232102

Arunachal Pradesh
Control room — 9436055743, 9612153293 and 9599929423 or dial the toll free number 11001902 

Assam
Helpline No: 104 (Sarathi) or 6913347770

Bihar
Helpline: 104

Chandigarh
Helpline: 9779558282

Chhattisgarh
Helpline: 0771-2235091
E-mail - idspssucg@rediffmail.com

Dadra and Nagar Haveli, Daman& Diu
Helpline: 104

Delhi
Helplines: 011 22307145, 011 22300012, 011 22300036 

Goa
Toll free helpline: 104

Gujarat
Helpline: 079-23250818 (Health), 079-23251900 (SEOC), 104
Email :ssoidsp@gmail.com

Haryana
Helpline: 8558893911
Helpline No. 108 functional in all districts

Himachal Pradesh
Toll free helpline - 104

Jammu and Kashmir
State level cell for Jammu and Kashmir - 0191-2549676
For Jammu division - 0191-2520982
Dr. Deepak Kapoor - 9419197338
For Kashmir division - 0194-2440283
DR SM Qadiri - 9419010363

Jharkhand
Control room- 9955837428 or 104

Karnataka: 
Toll free: 104
Email: ssuidspbangalore@gmail.com.

Kerala: 
24X7 helpline (DISHA) - 0471 2552056 / 1056 to contact health department in case of any respiratory symptom (including fever, cough, sore throat, breathlessness)
Control room numbers — 0471 2309250, 0471 2309251, 0471 230952

Ladakh
Helpline: 1982256462
Medical helpline: 102 
Lakshadweep: 4896263742

Maharashtra
Helpline: 020-26127394

Madhya Pradesh
Helpline: 104 or 0755-4094192
Email: idspssu@mp.gov.in

Manipur
Helpline: 3852411668

Meghalaya
Helpline: 9366090748

Mizoram
Helplines: 8259930355, 7630943153

Nagaland
24x7 helplines — 7005415243, 9856071745, 7005536953

Odisha
Helpline: 0674-2390466/9439994857

Puducherry
Helpline: 413-2336 050 / 2333 644 or 104

Punjab
Control room:  0172-2920074

Rajasthan
Helpline - 104
Control room (tourism dept) - 0141-2822851

Sikkim
Toll- free helpline: 104
District surveillance officers:
East - 7029372100,
West- 9593297809,
North - 9641957468,
South - 7407691463

Tamil Nadu
Landline: 044-29510400 or 044-29510500
Mobile: 94443 40496 or 87544 48477

Telangana: 
Helpline: 104

Tripura
Helpline: 0381-2315879

Uttar Pradesh: 
Helpline: 1800-180-5145

Uttarakhand
Helpline: 104 

West Bengal
Helplines: 1800 313 444 222/ 033 2341 2600

Wednesday, March 18, 2020

कोरोना आखिर फैला कैसे?


विदेशों से आने वालों की सघन जांच हवाई अड्डे पर हो रही है... 
ऐसा ही सुन रहे थे न आप अपने सोफे पर बैठ टीवी पर. और बड़े खुश रहे थे, हमारी सरकार ने ये कर दिया... हमारी सरकार ने वो कर दिया...
अब ये बताओ सबकी जाँच सघन हो रही थी तो ये हिंदुस्तान के कोने कोने तक कैसे पहुँच गया???

आओ बताता हूँ...
विदेशों से संक्रमित लोगों को जहाज में भर भरकर लाया गया और सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग कर लोगों को, जो संक्रमित थे आवारा कुत्तों की तरह छोड़ दिया गया. कोई हिमाचल चला गया, कोई केरल, कोई दिल्ली, कोई मुंबई और कोई बिहार. और आते जाते इन आवारा कुत्तों ने ट्रेन में, प्लेन में, बाजार में, शहर में, गाँव में हर जगह इस वाइरस को पहुँचा दिया. 

और आप  जहाज में भर भर के विदेशों से लोगों को लाने पर जो मोदी जी की जय कर रहे थे ना... यही ले डूबा हिंदुस्तान को. क्योकि सबके सब संक्रिमित थे... जो सिर्फ थर्मल स्क्रीनिंग में पकड़ा ना जा सका. कल ही मुल्लों को भी लेकर आई है एक जहाज, ये भी दंगा फसाद के साथ कोरोना फैलायेगे अब. 

सरकार और सरकारी सिस्टम कितना बेहतर कार्य करते हैं, ये वायरस के फैलने पर आप सबको समझ आ जाना चाहिए. 
क्यों अभी तक समझ नहीं आया??? 
तो बैठ के सोचो..... 
सरकार तो एकदम अलर्ट है ना... 
फिर ये देश के कोने कोने तक पहुँचा कैसे ?

नीचे दिए ग्राफ को देखो... ये फैलता कैसे हैं. 
सिर्फ मास्क लगा लेने से आप सुरक्षित नहीं हो जाने वाले. 
सफर करना बंद करो. ताकि बाकि लोग आपकी मुर्खता की वजह से जान ना गवा दें.




मिलना मिलाना छोडिये.... थोडा एंटी सोशल हो लीजिये.



Sunday, March 15, 2020

लेटेस्ट महामारी कोरोना के फैलने का कारण



अगर गौर करेंगे तो पायेंगे पिछले कुछ सालों से हर साल इस मौसम में एक नई बीमारी पैदा हो जाती है. कभी वर्ड फ्लू, कभी चिकनगुनियाँ, कभी कोरोना..... और ऐसा अब आगे भी चलता रहेगा.

अगर ध्यान दिया जाए तो आपको पता चलेगा कि सारे के सारे लेटेस्ट बीमारी जो महामारी बनकर फ़ैल रही है साल दर साल, वो फ़ैल रही है मांसाहार की वजह से. जिसका परिणाम भुगतना सबको पड़ता है चाहे वो शाकाहार्री हो या मांसाहारी.

सन्देश बिलकुल साफ आ रहा है, शाकाहार अपनाओ.
पर इसे न कोई समझना चाहता है और ना किसी को समझ ही आ रहा है. सरकार और वैज्ञानिक चाहे जितना चिल्ला ले, मांस और मुर्गे से ये कोरोना नहीं फैलती. पर अपनी मोटी बुद्दी लगाओ और इसकी उत्पत्ति के कारण को देखो, सोचो.

प्रकृति का सन्देश बिलकुल साफ है, अपना इयरफोन ठीक करो ताकि सन्देश भेजे तक जाएँ. जिसे मेरे कहे पर भरोसा नहीं जाओ मार्किट और चालीस रूपये किलो मुर्गा बिक रहा, ले आओ और मौज करो. 

ऐसा मौका फिर ना मिलने का.

जय श्रीराम 

Tuesday, February 18, 2020

मशिनियुग के मानव का जन्म

फेसबुक पर 12 साल हो गए.
इसके पहले ऑरकुट को भी इस्तेमाल कर चूका कई सालों तक. उस ज़माने में एक ग्रुप मैंने भी शुरू किया था जो दिल्ली एनसीआर बेस्ड था और उसपर 5000 लोग खुद जुड़े थे. ऑरकुट ने बाद में दम तोड़ दिया.
खैर, 12 साल बीत जाने के बाद भी मित्र की संख्या 1200 तक भी नहीं पहुँची, और हर साल और दो साल में छटनी कार्यक्रम भी करता रहता हूँ, जिसमें स्लीपर्स सेल को बाहर करता रहता हूँ. पिछले साल ही 500 लोगों को इसलिय unfriend किया क्योकिं उनके जिन्दा होने का कोई प्रमाण उनके अपने प्रोफाइल पर भी नहीं मिल रहा था. इसमें कई नजदीकी लोग और कई योगी-योगिनी भी थी. शायद समाधी मिल गई हो उन्हें.
मेरा इन्टरनेट से परिचय 1998 - 1999 में ही हो गया, मतलब 22 साल से ज्यादा हो गए मायाजाल पर. 12 साल का लम्बा सफ़र रहा फेसबुक पर. कई लोगों को मानसिक रोग से ग्रस्त होते और कई लोगों को मानसिक संतुलन खोते भी देख रहा हूँ. मतलब फेसबुक आपको कण्ट्रोल करने लगा है. पर मैंने ऐसी नौबत न आने दी कभी अपने जीवन में. और इसके लिए महीनों तक इससे दूर रहने का अभ्यास भी करता रहा. Whatsapp का शुरूआती इस्तेमालकर्ता रहा, पर जब लगातार - बारबार आती फालतू के सन्देश और दिन रात बेमतलब के विडिओ मानसिक शान्ति भंग करने लगे तो सालों तक अपने अकाउंट को डिलीट कर भी जिया और वो भी असीम शान्ति से.
आजकल फेसबुक फास्टिंग मोड़ में हूँ और दिन में एक आध बार दस मिनट के लिय ही इधर झांक रहा हूँ और किसी दिन वो भी नहीं. कहने का मतलब ये है की टेक्नोलोजी अपनी सुविधा और क्रिएटिविटी के लिए इस्तेमाल करिए ना कि अपने आपको उसके हवाले कर दीजिये. किसी की कमेंट और लाइक जब आपके मूड को दिशा देने लगे तो समझ लीजिये आप फेसबुक के गुलाम हो चुके हैं और मशिनियुग का मानव आपके अन्दर जन्म ले चूका है.

आपकी रामप्यारी चाय.... चाय...


आओ आज आपको एक गूढ़ ज्ञान दूँ...


सारे चाय पीने वाले कृप्या ज्ञानवाणी पर ध्यान दें, जे आपके लिए ही है. और हाँ मैं यहाँ आपको चाय छोड़ने नहीं बोलने वाला, आप निश्चित रहे. 😂
पिछली बार आपको बताया था ट्रेन के बिरयानी और अंडा बिरयानी का राज और आज बारी है आपकी रामप्यारी
चाय.... चाय...
(बिरियानी का फंडा का लिंक
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=10156733265908231&id=565053230)
आपकी प्यारी इसलिए बोला, मुझे इससे उतनी ही नफरत है जितनी शराब... बोले तो दारू से. 😝
नफरत इसलिए, क्योंकि है तो यह किसी काम का नहीं, उल्टा हजार बीमारियों की दुकान बना जाती आपके शरीर को.
खैर, मुझे इससे क्या.
आप पियो... आप मरो...
डॉक्टर को पैसे देते रहो... गैस.... एसिडिटी... हाइपरटेंशन... कब्ज... अल्सर... पाइल्स को बढ़ाते रहो....
चाय... चाय.... 😂
खैर मुद्दा जे भी ना है. 😜
असली बात जो आपको बताने वाला हूँ, वो है.... ट्रेन में आप जो चाय पीते हैं, बनती कैसे है? देखा है क्या किसी ने बनती हुई अपनी रामप्यारी को?
नहीं देखा तो चलो मैं दिखाता हूँ....
चाय वाले serving pot को नल 🚰 के नीचे लगाकर उसे भर लिया जाता है, थोड़ा खाली रखा जाता है ताकि दूध के लिए थोड़ी गुंजाईश रहे. अब इसे उठाकर सीधा लगा दिया जाता है गर्म होने. पता है गर्म कैसे करेंगे... अरे वो घरों में पानी गर्म करने के लिए रॉड आता है न बस उसे घुसेडे देते है और स्विच ऑन कर दिया हो गया. पानी गर्म होने पर उसमें चाय पत्ती को एक पोटली में बाँधकर डुबो देते हैं. हाँ जे कपड़ा हो सकता है उसके पहले साफ सफाई में इस्तेमाल हुआ हो 😜😂 थोड़ी देर के बाद दुध को पैकेट से सीधे गर्म होते serving pot में डाल दिया जाता है. अब जे मत समझ लेना कि 10 लीटर में 5 लीटर दुध दिया जा रहा. 😜 इसके साथ ही चीनी डाला दिया जाता है और किसी, यहाँ वहाँ पड़े डंडे से उसे मिला दिया जाता है और बन गया आपकी रामप्यारी चाय. यही serving pot लेकर दिन रात चाय वाला आपकी कान खाए रहता है हर डब्बे में. और आप पीते भी बड़े चाव और शान से हो 10 और 20 रुपये देकर. पियो पियो... मजे करो.
सुबह का बना चाय सुबह को खत्म न हुआ तो उसे फिर से एक बार गर्म कर दिया और फिर शुरू हो गया चाय.... चाय... 😝
अब चाय वाले की किस्मत खराब हो या मेरे जैसे मिल जाएं या फिर कुछ लोग घर से हॉट बोतल में लेकर भी चलते हैं और चाय न बिकी तो फिर वही चाय आप शाम और रात को सोते सोते भी यह कहते पीते हो कि मुझे तो सोने के पहले चाय न मिले तो नींद नहीं आती. बढ़िया है जी पियो... चाय.... चाय...
आपलोगों के लिए ही ठेकेदार आईआरसीटीसी को करोड़ों दे रहा पेंट्रीकार के ठेके का, आखिर उसके बीबी बच्चे कहाँ जाएंगे. आप न खाओगे बिरयानी और अंडा बिरयानी और न पियोगे चाय, तो उस बेचारे के बीबी बच्चे तो भूखे मर जायेंगे. समाजवाद अपनाओ... अपने को मारकर भी दूसरे के घर में चूल्हा जलाओ. 😂 😜
और हाँ, अगली बार से कोशिश करना कम से कम पाँच - सात कप चाय तो निपटा ही देना और नहीं तो क्या. 😂 और हाँ रेलवे के पेटेंट बिरियानी और अंडा बिरयानी भी जम के खाओ, भले घर से लाया आपका खाना बासी हो गया हो और फेंकने लायक हो. पर पेंट्रीकार का एक दिन पहले के चावल से बना अंडा 🥚 बिरियानी कभी बासी नहीं होता. आप आराम और शान से खाओ. 😂
आज के लिए इतना ज्ञान ही काफी है, नहीं तो दस्त हो जायेगा. 😂
हाँ, बात समझ आ जाए तो शेयर करते जाना, ताकि और तक बात पहुंचे.

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